Awareness against superstitions and witchcraft 26 july Hareli Meeting
at Amleshwar Dist Durg .andnight visit in rural area .अन्धविश्वास एवं
टोनही( डायन) प्रताड़ना खिलाफ जनजागरण अभियान .26 जुलाई हरेली अमावस्या को ग्राम अमलेश्वर जिला दुर्ग में सभा एवं रात्रि भ्रमण
Friday, July 25, 2014
Sunday, June 22, 2014
Awareness against superstitions and witchcraft. visited belgium,france,netherlands, switzerland
,luxembourg.meeting with social activists.my Lecture organised by
belgium skeptics in . brussels (capital of belgium ) on thursday 5 june
2014.discussion with president of belgium skeptic mr.paul de
belder,secretary tim trachet, jozef van giel,and others. अन्धविश्वास के
खिलाफ अभियान .बेल्जियम की संस्था बेल्जियम स्केप्टिक द्वारा बेल्जियम की
राजधानी ब्रसेल में व्याख्यान आयोजित ..बेल्जियम ,फ़्रांस ,नीदरलैंड
,लक्सम्बर्ग, स्विट्जरलैंड के .. अनेक स्थानो ,जिनेवा ,हेग ,सहित अनेक
महत्वपूर्ण स्थलों पर भ्रमण व सामाजिक कार्यकर्ताओ से चर्चा .बेल्जियम की
संस्था बेल्जियम स्केप्टिक द्वारा बेल्जियम की राजधानी ब्रसेल में
व्याख्यान ,परिचर्चा आयोजित .
Friday, May 2, 2014
बाल विवाह जैसीसामाजिक कुरीति के उन्मूलन के
लिए जन जागरण जरुरी-.डॉ .दिनेश मिश्र - बाल विवाह जैसी सामाजिक
कुरीति के उन्मूलन के लिए समाज के सभी वर्गों का सहयोग आवश्यक है .
शिक्षा का प्रचार प्रसार न होने
जागरूकता की कमी ,पुरानी परम्पराओ को पालन करने के नाम पर होने वाले बाल
विवाहों को रोकना सभी जागरूक नागरिकों का कर्त्तव्य है ,अक्षय तृतीया के
मौके पर अधिकाधिक संख्या में बल विवाह संपन्न होते है जिनमे कई बार तो वर
वधु बने बच्चे अंगूठा चूसते हुए माँ की गोद में बैठे रहते है तो अनेक
मामलों में दस ग्यारह वर्ष की उम्र में ही शादी कर जाती है इस आयु में
बच्चे न तो शारीरिक तथा मानसिक रूप से विवाह जैसी गंभीर
जिम्मेदारी निभाने के लायक होते है .बाल विवाह से बालिकाओ की पढाई
लिखाई बंद हो जाती है बल्कि उन्हें कम उम्र से ही मातृत्व का बोझ उठाना
पड़ता है जिसके लिए वे शारीरिक व मानसिक रूप से तैयार नहीं होती .बाल
विवाह की प्रथा न ही धार्मिक रूप से सही है और न ही सामाजिक रूप से .पुरातन
भारतीय व्यवस्था में भी व्यक्ति के शिक्षा पूर्ण करने के बाद युवावस्था
में ही विवाह कर गृहस्थ आश्रम में प्रवेश को उचित बताया गया है किसी भी
धर्मं ने नन्हे बच्चों की शादी को उचित नहीं ठहराया है बल्कि अल्पव्यस्क
बालिकाओ की मृत्यु भी प्रसूति के समय हो जाती है ,
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