अंधविश्वास,डायन (टोनही) प्रताड़ना एवं सामाजिक कुरीतियों के खिलाफ जनजागरण

I have been working for the awareness against existing social evils,black magic and witchcraft that is prevalent all across the country and specially Chhattisgarh. I have been trying to devote myself into the development of scientific temperament among the mass since 1995. Through this blog I aim to educate and update the masses on the awful incidents & crime taking place in the name of witch craft & black magic all over the state.

Sunday, June 7, 2026

 *The Chhattisgarh Tonhi Pratadna Prevention Act, 2005 and Dr. Dinesh Mishra*


Senior ophthalmologist and social activist Dr. Dinesh Mishra played a pivotal role in conceptualizing and bringing into effect the Chhattisgarh Tonhi Torture Prevention Act, 2005.

Since 1995, he launched the "No Woman is a Witch (Tonhi)" campaign in the Chhattisgarh region. He continuously toured rural areas, met women who had been tortured and their families, and initiated public awareness drives and advocacy for a strong legal framework to fight this social evil.

*Dr. Mishra’s Key Efforts Toward Legislation:*

1.  *May 20, 2000*: Met Justice Gulab Gupta, Chairperson of the Madhya Pradesh Human Rights Commission, and submitted a memorandum demanding legislation in undivided Madhya Pradesh.

2.  *July 9, 2001*: Submitted a memorandum to Chhattisgarh Chief Minister Shri Ajit Jogi demanding a law against Tonhi torture.

3.  *August 30, 2001*: Met Justice J.S. Verma, Chairperson of the National Human Rights Commission, submitted a memorandum, and filed a complaint regarding a serious case of Tonhi torture.

4.  *December 10, 2001*: Met Justice K.M. Agarwal, Chairperson of the Chhattisgarh Human Rights Commission, and submitted a memorandum for enacting an anti-Tonhi torture law in the newly formed state of Chhattisgarh.

5.  *December 20, 2002*: Submitted another memorandum to Chief Minister Shri Ajit Jogi for enacting an anti-witchcraft torture law in the state.

6.  *December 31, 2003*: Met the then Chief Minister Dr. Raman Singh, discussed the proposed law, and submitted a memorandum.

7.  *January 28, 2004*: Met President Dr. A.P.J. Abdul Kalam and submitted a memorandum for enacting a Witchcraft/Tonhi Torture Prevention Act.

8.  *September 24, 2004*: Delivered a lecture and participated in a discussion on the need for a Tonhi/Dayan Torture Prevention Act at a workshop organized by the Women and Child Development Department.

9.  *December 18, 2004*: Addressed a meeting of the Chhattisgarh State Women’s Commission, presenting suggestions for the law along with data on cases. A draft bill was also sent to the government.

10. *July 2005*: Personally met all MLAs of the state and submitted written memorandums, urging them to support the bill to be introduced in the Assembly.

*Enactment of the Act and Subsequent Work*  
On September 30, 2005, the Chhattisgarh Tonhi Torture Prevention Act, 2005 was passed by the Chhattisgarh Legislative Assembly.

After the Act was enacted, Dr. Mishra traveled from village to village to spread awareness about the law. He continued to meet rural communities through public meetings and field visits.

In recognition of his contribution to eliminating superstition and social evils through this landmark legislation, the Chhattisgarh government honored Dr. Dinesh Mishra with the state award "Pandit Ravishankar Shukla Samman". On November 7, 2006, during the State Foundation Day celebrations, the award was presented to him by the then President of India, Dr. A.P.J. Abdul Kalam. The Chhattisgarh State Women’s Commission also honored Dr. Mishra on its Foundation Day.

 #*छत्तीसगढ़ राज्य टोनही प्रताड़ना निवारण अधिनियम, 2005 और डॉ. दिनेश मिश्र*


वरिष्ठ नेत्र विशेषज्ञ एवं सामाजिक कार्यकर्ता डॉ. दिनेश मिश्र ने छत्तीसगढ़ राज्य टोनही प्रताड़ना निवारण अधिनियम, 2005 की परिकल्पना और उसे साकार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

उन्होंने वर्ष 1995 से ही छत्तीसगढ़ अंचल में "कोई नारी टोनही नहीं" अभियान आरंभ किया। ग्रामीण क्षेत्रों का लगातार दौरा किया, प्रताड़ित महिलाओं और उनके परिजनों से भेंट की तथा इस सामाजिक कुरीति के विरुद्ध जन-जागरूकता फैलाने और सक्षम कानून बनवाने की पहल की।

*कानून निर्माण की दिशा में डॉ. मिश्र के प्रमुख प्रयास:*

1.  *20 मई 2000*: मध्य प्रदेश मानव अधिकार आयोग के अध्यक्ष न्यायमूर्ति गुलाब गुप्ता से भेंट कर अविभाजित मध्य प्रदेश में कानून बनाने हेतु ज्ञापन सौंपा।

2.  *9 जुलाई 2001*: छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री श्री अजीत जोगी को टोनही प्रताड़ना के विरोध में कानून बनाने के लिए ज्ञापन दिया।

3.  *30 अगस्त 2001*: राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग के अध्यक्ष न्यायमूर्ति जे.एस. वर्मा से भेंट कर ज्ञापन प्रस्तुत किया तथा टोनही प्रताड़ना के एक गंभीर मामले की शिकायत की।

4.  *10 दिसंबर 2001*: छत्तीसगढ़ मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष न्यायमूर्ति के.एम. अग्रवाल से भेंट कर नवगठित छत्तीसगढ़ राज्य में टोनही प्रताड़ना विरोधी कानून बनाने हेतु ज्ञापन सौंपा।

5.  *20 दिसंबर 2002*: मुख्यमंत्री श्री अजीत जोगी को प्रदेश में डायन प्रताड़ना विरोधी अधिनियम बनाने हेतु पुनः ज्ञापन दिया।

6.  *31 दिसंबर 2003*: तत्कालीन मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह से भेंट कर इस कानून के संबंध में चर्चा की और ज्ञापन सौंपा।

7.  *28 जनवरी 2004*: राष्ट्रपति डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम से भेंट कर डायन एवं टोनही प्रताड़ना निवारण अधिनियम बनाने हेतु ज्ञापन दिया।

8.  *24 सितंबर 2004*: महिला एवं बाल विकास विभाग की कार्यशाला में डायन/टोनही प्रताड़ना निवारण अधिनियम की अनिवार्यता पर व्याख्यान दिया।

9.  *18 दिसंबर 2004*: छत्तीसगढ़ राज्य महिला आयोग की बैठक में कानून बनाने के सुझाव और घटनाओं के आँकड़े प्रस्तुत किए। साथ ही शासन को विधेयक का प्रारूप भी भेजा।

10. *जुलाई 2005*: राज्य के सभी विधायकों से व्यक्तिगत भेंट कर एवं लिखित ज्ञापन देकर विधानसभा में प्रस्तुत होने वाले विधेयक का समर्थन करने का अनुरोध किया।

*अधिनियम पारित होना और बाद का कार्य*  
30 सितंबर 2005 को छत्तीसगढ़ राज्य टोनही प्रताड़ना निवारण अधिनियम, 2005 छत्तीसगढ़ विधानसभा में पारित हुआ। 

अधिनियम पारित होने के पश्चात डॉ. मिश्र ने गाँव-गाँव जाकर इस कानून का प्रचार-प्रसार किया। सभाओं और निरंतर दौरों के माध्यम से ग्रामीणों से मिलते रहे।

छत्तीसगढ़ सरकार ने अंधविश्वास एवं सामाजिक कुरीतियों के उन्मूलन के लिए इस महत्वपूर्ण अधिनियम को बनाने में योगदान देने पर डॉ. दिनेश मिश्र को राज्य अलंकरण "पंडित रविशंकर शुक्ल सम्मान" से सम्मानित किया। 7 नवंबर 2006 को राज्योत्सव में तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम ने उन्हें यह सम्मान प्रदान किया। छत्तीसगढ़ राज्य महिला आयोग ने भी अपने स्थापना दिवस पर डॉ. दिनेश मिश्र को सम्मानित किया.

Sunday, September 18, 2022

  बिजली गिरने पर तुरंत अस्पताल ले जायें .डॉ दिनेश मिश्र

@ गोबर में गाड़ना नहीं है इलाज.
# वरिष्ठ नेत्र विशेषज्ञ एवं अंधश्रद्धा निर्मूलन समिति के अध्यक्ष डॉ दिनेश मिश्र ने कहा बरसात के मौसम में बारिश के साथ बादलों की गड़गड़ाहट तथा बिजली गिरने की अनेक घटनाएं सामने आती हैं ,जिसमें व्यक्ति को त्वरित चिकित्सकीय उपचार की आवश्यकता होती है . पर  अंधविश्वास के चलते पीड़ित व्यक्ति को गोबर के गड्ढे में  कंधे तक गाड़ कर इलाज करने के मामले छत्तीसगढ़, बिहार ,झारखण्ड, ओडिशा के ग्रामीण अंचलों से सामने आते है ,गम्भीर रूप से घायल मरीज को अस्पताल पहुंचाने की बजाय गोबर के गड्ढे में डालकर ठीक होने का इंतजार करते रहना ,इलाज नहीं,अंधविश्वास है.
डॉ दिनेश मिश्र ने कहा कुछ दिनों पहले जशपुर ,सरगुजा  में 3 व्यक्तियों पर बिजली गिरी थी तथा वे बुरी तरह घायल हो गए थे ,वहाँ उन्हें ग्रामीणों ने उपचार के लिए एक गड्ढे में डाल कर  गोबर भर दिया ,बाद में समझाने बुझाने पर उन्हें अस्पताल भेज गया तब तक उनकी मृत्यु हो गयी थी , छत्तीसगढ़ के  ग्रामीण अंचल सरगुजा के बैकुंठपुर कोरिया, रायगढ़ तथा अन्य ग्रामीण क्षेत्र  से बिजली गिरने पर गोबर के गड्ढे में डालने की घटनाएं सामने आयी है,जिनमें पीड़ित व्यक्ति अपनी जान से हाथ धो बैठता है.
डॉ. दिनेश मिश्र ने बताया दुनिया में हर साल बिजली गिरने की करीब 2 लाख 40 हज़ार घटनाएं दर्ज होती हैं. इन घटनाओं में कितनी जानें जाती हैं, इसे लेकर कई तरह के अध्ययन अलग आंकड़े बताते हैं. एक स्टडी की मानें तो दुनिया में 6 हज़ार लोग हर साल बिजली गिरने से मारे जाते हैं.
दूसरी तरफ, नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो की मानें तो सिर्फ 
भारत में प्रतिवर्ष करीब 2500 व्यक्तियों की मृत्यु बिजली गिरने से होती है, जबकि इनसे कई गुणा व्यक्ति बिजली गिरने से आहत होते है अनेक व्यक्ति अस्पताल पहुंचाए जाने के पहले ही दम तोड़ देते है,और हजारों तो कुछ अंधविश्वास और स्थानीय स्तर पर झाड़फूंक ,उपचार करते रहने के कारण अस्पताल ही नहीं ले जाये जाते कुछ मामलों में तो पीड़ित को 2 घण्टे गोबर में गाड़ने पर ठीक नही होने पर उसे दुबारा गोबर में ही गाड़ दिया गया.
डॉ दिनेश मिश्र ने बताया आकाश में बादलों के टकराव/घर्षण से इलेक्ट्रिसिटी उत्पन्न होती है जो तीव्र गति से पृथ्वी की ओर आती है इसे ही बिजली गिरना ,तड़ित कहते हैं, आकाशीय बिजली में 10 करोड़ वोल्ट तथा 10 हजार एम्पीयर से अधिक करेंट होता है जो बहुत शक्तिशाली होता है ,हम अपने घरों जो विद्युत उपयोग करए हैं वह मात्र 220 वोल्ट होता है ,जब बादलों में घर्षण से विद्युत उत्पन्न होती है तब यह 3 लाख किलोमीटर प्रति घण्टे की रफ्तार से पृथ्वी पर आती है तथा इसमें 15 हजार डिग्री फैरनहाईट की ऊष्मा होती है जो सूर्य की ऊष्मा से भी अधिक होती है,चूँकि प्रकाश की गति ध्वनि की गति से अधिक होती है इसलिए बिजली गिरती हुई पहले दिखाई देती है ,आवाज बाद में सुनाई देती है.
डॉ दिनेश मिश्र ने बताया बरसात के मौसम बिजली गिरने का खतरा बना रहता है इसलिए जब बरसात हो रही हो ,बादल गरज रहे हों तब व्यक्ति को सावधानियां रखना चाहिए जैसे बिजली के उपकरणों को बंद रखें ,लैंडलाइन फोन का उपयोग न करें, पेड़,बिजली के खम्भे, ऊंचे स्थानों के पास न खड़े हों,धातु /मेटल के उपकरण मशीने,बाइक, का उपयोग न करें,यहां तक धातु के हेंडल वाले छाते का उपयोग न करें .यदि स्नान कर रहे हो तब भी नदी ,नाले तालाबो से बाहर निकलें,बचाव के लिये जमीन पर न लेटें बल्कि बैठे घुटनों पर हाथ रख  सिर झुका बैठे सिर जमीन पर न टिकाएं ।घर,दुकान ,बिल्डिंगों में तड़ित चालक लगायें .
डॉ  दिनेश मिश्र ने बताया बिजली गिरने से व्यक्ति की हृदय गति रुकने, साँस रुकने ,से मृत्यु हो जाती है जलने के निशान,कान के परदों का फट जाना ,मोतियाबिंद , शरीर में खास कर दिमाग मे रक्तस्राव ,खून के थक्के जमना,लकवा,डिप्रेशन आदि होने की सम्भावना रहती है बिजली गिरने से पीड़ित व्यक्ति के उपचार के लिए उसे यथासम्भव अतिशीघ्र अस्पताल ले जाना चाहिए,जहां उसे भरती कर उसके हृदय , सांस, सहित पूरे शरीर की सही ढ़ंग से जांच हो सके,एवम् सही इलाज हो सके 
डॉ दिनेश मिश्र ने कहा ,बिजली गिरने से पीड़ित मरीज को गोबर से भरे  गड्ढे में गाड़ कर रखना,झाड़ फूंक करना,उसे ठंडे पानी से नहलाना उस मरीज के स्वास्थ्य के साथ, अंधविश्वास तथा आपराधिक लापरवाही है ,इससे उस प्रभावित मरीज की बचने की संभावना कम हो जाती है बल्कि शासन को ऐसे स्थानों को चिन्हित कर वहां बरसात के मौसम में  कम से कम 10 बिस्तरों का  इंटेंसिव केयर यूनिट बना कर त्वरित चिकित्सकीय सहायता उपलब्ध करानी चाहिए.ताकि लोगों की प्राण रक्षा की जा सके.
 डॉ दिनेश मिश्र ,नेत्र विशेषज्ञ 

 # बकरीद पर मेमने को जरूरतमंद परिवार को दान,केक काट कर  मनाने की सफल पहल डॉ दिनेश मिश्र .

#अपील रंग ला रही #
     @ईदुज्जुहा(बकरीद) में जीवित प्राणी की कुर्बानी देने के बदले केक काटकर  धार्मिक रस्म अदा  करने की, डॉ.  दिनेश मिश्र  की अपील का अब धीरे धीरे असर होने लगा है.
सन 2016 में डॉ दिनेश मिश्र के असम प्रवास के बाद पिछले कुछ वर्षों से असम के  एक विज्ञान शिक्षक ने प्रति वर्ष एक  मेमने  को एक जरूरतमंद परिवार को दान देना आरम्भ किया ,कि वे उसका पालन करेंगे और वे इस त्यागकी भावना  के साथ प्रति वर्ष  ईद मनाते हैं ,वही अन्य स्थानों पर सम्पर्क ,अपील से  लखनऊ, आगरा, के अलावा मुजफ्फरपुर, गाजियाबाद, सहित अनेक स्थानों से पशु की कुर्बानी के बदले केक काट कर बकरीद मनाने के उदाहरण सामने आ रहे  हैं   .
# अंधश्रद्धा निर्मूलन समिति के अध्यक्ष डॉ दिनेश मिश्र ने बताया  असम के धुबरी में रहने वाले विज्ञान शिक्षक श्री अहमद हुसैन ने बकरीद में स्वयं के द्वारा पाले हुए  मेमने  की कुर्बानी देने के बदले  स्थानीय जरूरतमंद परिवार को दान  किया ताकि उस परिवार को मदद हो सके. वहीं कुछ अन्य स्थानों से भी सकारात्मक खबरे आयी है जिनमें इस वर्ष मध्यप्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़, उत्तरप्रदेश, दिल्ली,    सहित अनेक प्रदेशों में यह  सकारात्मक पहल हुई .
 डॉ दिनेश मिश्र ने कहा   जन जागरूकता प्रयासों के चलते  देश के कुछ स्थानों से पिछले वर्ष वर्ष पहली बार  जीवित प्राणी की कुर्बानी देने के बदले  केक काटकर धार्मिक रस्म अदा करने के इको फेंडली ईद मनाने के  उदाहरण सामने आए.  जो इस बार बढ़े हैं .
 अंधश्रद्धा निर्मूलन समिति के अध्यक्ष डॉ दिनेश मिश्र ने कहा देश के अनेक राज्यों में पशुबलि के निषेध के सम्बंध में कानून बने हुए हैं पर उनका  पालन न होने से लाखों निर्दोष मासूम पशुओं की कुर्बानी /बलि दी जाती है ।  जबकि सभी धर्म प्रेम,अहिंसा की शिक्षा देते हैं ,अपनी मनोकामनाओं  की पूर्ति के लिए किसी दूसरे प्राणी की जान लेना ठीक नहीं है।
डॉ दिनेश मिश्र ने कहा पिछले अनेक वर्षों से विभिन्न धार्मिक अवसरों पर पशु की कुर्बानी, पशु वध/बलि की  कुरीति /परम्परा के विरोध में जनजागरण कर रही हैं चार वर्ष पूर्व महाराष्ट्र के कोराडी के मंदिर में,तथा कुछ अन्य स्थानों में नवरात्रि में  बलि प्रथा बंद हुई है ,वहीं बकरीद में भी अनेक स्थानों में मुस्लिम धर्मावलंबियों ने कुर्बानी की प्रथा का परित्याग किया ,पिछले कुछ समय से अन्य देशों के साथ भारत में भी लखनऊ आगरा ,मेरठ मुजफ्फरपुर,  रायपुर, दमोह, नगरी, जयपुर, उदयपुर, बालाघाट, शिवपुरी 
सहित अनेक स्थानों में जन जागरण के प्रयासों से लोगों ने ईदुज्जुहा(बकरीद) में बकरे के स्थान पर केक काटा,कुछ स्थानों पर तो लोगों ने केक पर ही बकरे का चित्र लगाया और,कुछ स्थानों पर चॉकलेट का  बकरा बना कर न केवल सांकेतिक रूप से धार्मिक रस्म अदा की ,बल्कि निर्दोष प्राणियों की रक्षा भी की . डॉ .दिनेश मिश्र ने कहा महात्मा बुद्ध और महावीर स्वामी भी अहिसा के सिद्धांत को प्रचारित करते रहे  महावीर स्वामी ने जियो और जीने दो के सिद्धांत को प्रमुखता दी है, वही अपने उद्धरणों में महात्मा बुद्ध ने कहा है कि मारने वाले से बचाने वाला बड़ा होता है  यदि हम किसी को जीवन नहीं दे सकते ,तो हमें किसी का जीवन लेने का अधिकार नहीं है । 
डॉ दिनेश मिश्र ने कहा है कुर्बानी का अर्थ त्याग करना होता है ,अपनी ओर से किसी जरूरतमंद को आवश्यकतानुसार   नगद राशि,दवा,कपड़े ,किताबें ,स्कूल फीस आदि दान कर भी आत्मसंतुष्टि पाई जा सकती है,साथ ही  देश के अन्य प्रदेशों की तरह    किसी जिंदा प्राणी  को काट कर उसकी जान कुर्बान करने के स्थान पर केक काट कर न केवल धार्मिक रस्म अदा करने बल्कि निर्दोष प्राणी की जान बचाने की पहल  की जा सकती है और आगामी वर्षों में ऐसे प्रगतिशील कदमों में और भी अधिक परिवारों के जुड़ने का विश्वास है.
डॉ. दिनेश मिश्र 

  कोई नारी डायन/टोनही नहीं : डॉ. दिनेश मिश्र,  

@ सावधानी रखकर बीमारियों से बचे
@ हरेली में  रात्रि भ्रमण,

# अंधविश्वास, पाखंड व सामाजिक कुरीतियों के निर्मूलन के लिए कार्यरत संस्था अंधश्रद्धा निर्मूलन समिति के अध्यक्ष डॉ. दिनेश मिश्र  ने कहा हरियाली के प्रतीक हरेली अमावस्या की रात को ग्रामीणजनों के मन से टोनही, भूत-प्रेत का खौफ हटाने के लिए समिति ने गांवों मे रात्रि भ्रमण कर ग्रामीणजनों से संपर्क किया,,समिति के दल ने रात्रि 10.00 बजे से रात्रि 3.00 बजे तक  रायपुरा, अमलेश्वर, अमलेश्वरडीह, कोपेडीह, मोहदा झीठ भटगांव, मुजगहन, ,ग्रामों का दौरा किया। रात्रि में नदी तट ,तालाब,श्मशान घाट पर भी गए.कहीं कहीं ग्रामीणों ने जादू-टोना, झाडफ़ूंक पर विश्वास होने की बात स्वीकार की। लेकिन किसी ने भी कोई अविश्वसनीय चमत्कारिक घटना की जानकारी नहीं दी। समिति के दल  में शामिल डॉ दिनेश,मिश्र  डॉ.शैलेश जाधव, ज्ञानचंद विश्वकर्मा, डॉ प्रवीण देवांगन, प्रियांशु पांडे,  डॉ.बंछोर ने अनेक ग्रामीणों से चर्चा  की.
 डॉ. दिनेश मिश्र ने कहा ग्रामीण अंचल में हरियाली अमावस्या (हरेली) के संबंध में काफी अलग अलग मान्यताएं हैं अनेक स्थानों पर इसे जादू-टोने से जोड़कर भी देखा जाता है, कहीं-कहीं यह भी माना जाता है कि इस दिन, रात्रि में विशेष साधना से जादुई सिद्वियां प्राप्त की जाती है जबकि वास्तव में यह सब परिकल्पनाएं ही हैं, जादू - टोने का कोई अस्तित्व नहीं है तथा कोई महिला टोनही नहीं होती। पहले जब बीमारियों व प्राकृतिक आपदाओं के संबंध में जानकारी नहीं थी तब यह विश्वास किया जाता था कि मानव व पशु को होने वाली बीमारियां जादू-टोने से होती है। बुरी नजर लगने से, देखने से लोग बीमार हो जाते है तथा इन्हें बचाव के लिए गांव, घर को तंत्र-मंत्र से बांध देना चाहिए तथा ऐसे में कई बार विशेष महिलाओं पर जादू-टोना करने का आरोप लग जाता है वास्तव में सावन माह में बरसात होने से वातावरण का तापमान अनियमित रहता है, उमस, नमी के कारण बीमारियों को फैलाने वाले कारक  बैक्टीरिया,फंगस वायरस अनुकूल वातावरण पाकर काफी बढ़ जाते है। इस समय विश्व में कोरोना के संक्रमण का प्रकोप है जिससे बचाव के लिए भी सावधानी रखना आवश्यक है ,मास्क पहिनने  ,बार बार हाथ धोने ,आपसी दूरी बनाए रखने सोशल डिस्टेन्स बनाये रखने से कोरोना से बचा जा सकता है वही दूसरी ओर गंदगी, प्रदूषित पीने के पानी, भोज्य पदार्थ के दूषित होने, मक्खियां, मच्छरो के बढने से बीमारियां एकदम से बढ़ने लगती हैं  जिससे गांव, गांव में आंत्रशोध, पीलिया, वायरल फिवर,डेंगू, मलेरिया के मरीज बढ़ जाते है तथा यदि समय पर ध्यान नहीं दिया गया हो तो पूरी बस्ती ही मौसमी संक्रामक रोगों की शिकार हो जाती है। वहीं हाल फसलों व पशुओं का भी होता है, इन मौसमी बीमारियों से बचाव के लिए पीने का पानी साफ हो, भोज्य पदार्थ दूषित न हो, गंदगी न हो, मक्खिंया, मच्छर न बढ़े,जैसी बुनियादी बातों पर ध्यान देने की आवश्यकता है। स्वास्थ्य संबंधी सावधानियां रखने से  लोग पशु कोरोना तथा अन्य संक्रमणों व बीमारियों से बचे रह सकते है। इस हेतु किसी भी प्रकार के तंत्र-मंत्र से घर, गांव बांधने की आवश्यकता नहीं है। साफ-सफाई अधिक आवश्यक है, इसके बाद यदि कोई व्यक्ति इन मौसमी बीमारियों से संक्रमित हो तो उसे फौरन चिकित्सकों के पास ले जाये, संर्प दंश व जहरीले कीड़े के काटने पर भी चिकित्सकों के पास पहुंचे। बीमारियों से बचने के लिए साफ-सफाई, पानी को छानकर, उबालकर पीने, प्रदूषित भोजन का उपयोग न करने तथा गंदगी न जमा होने देने जैसी बातों पर लोग ध्यान देंगे तथा स्वास्थ्य के प्रति सचेत रहेंगे तो तंत्र-मंत्र से बांधनें की आवश्यकता नहीं पड़ेगी। बीमारियों खुद-ब-खुद नजदीक नहीं फटकेंगी, मक्खिंया व मच्छर किसी भी कथित तंत्र-मंत्र से अधिक खतरनाक है। 
 डॉ. मिश्र ने कहा ग्रामीणजनों से अपील है कि वे अपने गांव में अंधविश्वास न फैलने दे तथा ध्यान रखें कि गांव में कोई महिला को जादूटोने के आरोप में प्रताडि़त न किया जाये। कोई भी नारी टोनही नही होती.  ग्रामीणों ने आश्वस्त किया कि उनके गांव में कभी भी किसी महिला को टोनही के नाम पर प्रताडि़त नहीं किया जावेगा तथा ध्यान रखेंगे कि आसपास में ऐसी कोई घटना न हो।  कुछ ग्रामीणों ने कहा  कि यह माना जाता है कि हरेली की रात टोनही बरती (जलती हुई) दिखाई देती है। लेकिन उन्होंने यह भी बताया कि यह सब सुनी सुनायी बातें हैंै। समिति को कोई भी ऐसा प्रत्यक्षदर्शी नहीं मिला जिसने ऐसी कोई चमत्कारिक घटना देखी हो। लेकिन रात्रि में लोग खौफजदा रहते है और घर से बाहर निकलने में डरते है। ग्रामीण टोनही के अस्तित्व पर या उसके कारगुजारियों पर चर्चा जरूर करते हैं पर यह नहीं बता पाते कि किसी ने हरेली के रात वास्तव में कुछ करते हुए देखा। 
डॉ. मिश्र ने कहा कि सुनी सुनायी बातों के आधार पर अफवाहें एवं भ्रम फैलता है, वास्तव में ऐसा कुछ भी चमत्कार न हुआ है और न संभव है। इसलिये किसी भी को ग्रामीण को कथित जादू-टोने  अथवा टोनही भ्रम व भय में नहीं पडना चाहिए। 
 डॉ. दिनेश मिश्र

 #टोनही के संदेह में प्रताडि़त महिलाओं  ने डॉ. दिनेश मिश्र को राखी बाँधी

@अंधश्रद्धा निर्मूलन समिति का ग्रामों में अभियान

#अंधश्रद्धा निर्मूलन समिति ने रक्षाबंधन का त्यौहार  प्रदेश के ग्रामीण अंचल  में उन स्थानों पर जा कर  मनाया ,जहां जादू टोना, टोनही के आरोप में क्रूरतम शारीरिक एवम मानसिक प्रताडऩा दी गई थी पिछले कुछ वर्षों से समिति अंधविश्वास के कारण समाज से प्रताडि़त एवं बहिष्कृत महिलाओं को जोडऩे की इस मुहिम के अंतर्गत यह आयोजन कर रही है. 
जिसके अंतर्गत इस क्रम में समिति के अध्यक्ष डॉ. दिनेश मिश्र ने अपने साथियों सहित  ग्रामीण अंचल का  दौरा किया ,तथा  जाकर प्रताडि़त महिलाओं  तथा उसके परिजनों से मिले,  महिलाओं ने उन्हें राखी बांधी. प्रताडि़त  महिलाओं  ने बताया की अनेक बाद भी न ही उन्हें न्याय मिला है और तो और जो दोषी ग्रामीण हैं उन्हें सजा भी नहीं मिली है। समिति की ओर से डॉ. दिनेश मिश्र ने उन्हें हर संभव मदद एवं मार्गदर्शन का भरोसा दिलाया। इसके बाद समिति के सदस्यों ने ग्रामीणों से मुलाकात की और उन्हें टोनही प्रताडऩा से संबंधित पोस्टर पॉम्पलेट एवं किताबें भेंट की जिन्हें पंचायतों में लगाया जाएगा।
समिति के सदस्य ग्रामीणों से मिले तथा उन्हें किसी भी अंधविश्वास में ना पडऩे की समझाइश देते हुए डॉ. दिनेश मिश्र ने कहा जादू - टोने का कोई अस्तित्व नहीं है तथा कोई महिला टोनही नहीं होती। पहले जब बीमारियों व प्राकृतिक आपदाओं के संबंध में जानकारी नहीं थी तब यह विश्वास किया जाता था कि मानव व पशु को होने वाली बीमारियां जादू-टोने से होती है तथा ऐसे में कई बार विशेष महिलाओं पर जादू-टोना करने का आरोप लग जाता है।  गंदगी, प्रदूषित पीने के पानी, भोज्य पदार्थ के दूषित होने, मक्खियां, मच्छरो के बढने से बीमारियां एकदम से बढ़ जाती है तथा पूरी बस्ती ही मौसमी,वायरल, संक्रामक रोगों की शिकार हो जाती है। वहीं हाल फसलों व पशुओं का भी होता है, इन मौसमी बीमारियों से बचाव के लिए पीने का पानी साफ हो, भोज्य पदार्थ दूषित न हो, गंदगी न हो, मक्खिंया, मच्छर न बढ़े, सोशल डिस्टेंस,हाथों को बार बार धोने, मास्क,पहिनने सेनेटाइजर,जैसी बुनियादी बातों पर ध्यान देने की आवश्यकता है।

 #  डायरिया में तंत्र मंत्र से गांव बांधने के बदले सावधानी रखें. डॉ. दिनेश मिश्र

@ धमधा के धौराभाटा को बांधने का  मामला.

#  अंधश्रद्धा निर्मूलन समिति के अध्यक्ष डॉ.
 डॉ. दिनेश मिश्र ने कहा   पिछले सप्ताह धमधा के धौराभाटा से समाचार मिला है कि वहाँ गाँव मे डायरिया का संक्रमण  वृहद स्तर पर फैला है जिससे काफी ग्रामीण प्रभावित हुए है.तथा गांव में सरपंच व अन्य ग्रामीणों ने बैठक कर हर घर से चार सौ रुपये चंदा  लिया औरइस प्रकार 210 घरों से चौरासी हजार रुपये एकत्र किये तथा उन पैसों से गांव को डायरिया से ठीक करने के लिए  उपचार कराने के बदले एक बैगा को दैवीय प्रकोप  ठीक करने के लिए बुलाया, उस बैगा ने  गांव को तंत्र मंत्र से बांधने के लिए अनुष्ठान की तथाकथित प्रक्रिया पूरी की .जो कि विश्वसनीय नहीं है. पूरी तरह से अंधविश्वास का मामला है.
डॉ. दिनेश मिश्र ने कहा बरसात के मौसम में संक्रामक रोग तेजी से फैलते हैं . इस बार भी कुछ गांवों से जल प्रदूषण से  डायरिया ,,संक्रमण से बुखार , सर्दी खांसी, के मामले आ रहे हैं.और उपचारऔर सावधानियां रखने से लोग ठीक हो रहे हैं.
  जादू - टोने,जैसी मान्यताओं  का कोई अस्तित्व नहीं है तथा कोई महिला टोनही नहीं होती। पहले जब बीमारियों व प्राकृतिक आपदाओं के संबंध में जानकारी नहीं थी तब यह विश्वास किया जाता था कि मानव व पशु को होने वाली बीमारियां जादू-टोने ,मन्त्र पढ़ने से से होती है। बुरी नजर लगने से, देखने से लोग बीमार हो जाते है तथा इन्हें बचाव के लिए गांव, घर को तंत्र-मंत्र से बांध देना चाहिए तथा ऐसे में कई बार विशेष महिलाओं पर जादू-टोना करने का आरोप लग जाता है वास्तव में  बरसात के मौसम में  से वातावरण का तापमान अनियमित रहता है, उमस, नमी के कारण बीमारियों को फैलाने वाले कारक  बैक्टीरिया,फंगस वायरस अनुकूल वातावरण पाकर काफी बढ़ जाते है।पेय जल, भी प्रदूषित हो जाता है अनेक स्थानों में बाढ़ की भी स्थिति रहती है . इस समय विश्व में कोरोना के संक्रमण का प्रकोप है जिससे बचाव के लिए भी सावधानी रखना आवश्यक है ,मास्क पहिनने  ,बार बार हाथ धोने ,आपसी दूरी बनाए रखने सोशल डिस्टेन्स बनाये रखने से कोरोना और दूसरी संक्रामक बीमारियों  से बचा जा सकता है वही दूसरी ओर गंदगी, प्रदूषित पीने के पानी, भोज्य पदार्थ के दूषित होने, मक्खियां, मच्छरो के बढने से बीमारियां एकदम से बढ़ने लगती हैं  जिससे गांव, गांव में आंत्रशोध, पीलिया, वायरल फिवर,डेंगू, मलेरिया के मरीज बढ़ जाते है तथा यदि समय पर ध्यान नहीं दिया गया हो तो पूरी बस्ती ही मौसमी संक्रामक रोगों की शिकार हो जाती है।जैसा कि धौराभाटा व कुछ अन्य ग्रामों में हुआ  वहीं हाल फसलों व पशुओं का भी होता है, इन मौसमी बीमारियों से बचाव के लिए पीने का पानी साफ हो, भोज्य पदार्थ दूषित न हो, गंदगी न हो, मक्खिंया, मच्छर न बढ़े,जैसी बुनियादी बातों पर ध्यान देने की आवश्यकता है। स्वास्थ्य संबंधी सावधानियां रखने से  लोग पशु कोरोना तथा अन्य संक्रमणों व बीमारियों से बचे रह सकते है। इस हेतु किसी भी प्रकार के तंत्र-मंत्र से घर, गांव बांधने की आवश्यकता नहीं है। साफ-सफाई अधिक आवश्यक है, इसके बाद यदि कोई व्यक्ति इन मौसमी बीमारियों से संक्रमित हो तो उसे फौरन चिकित्सकों के पास ले जाये, संर्प दंश व जहरीले कीड़े के काटने पर भी चिकित्सकों के पास पहुंचे। बीमारियों से बचने के लिए साफ-सफाई, पानी को छानकर, उबालकर पीने, प्रदूषित भोजन का उपयोग न करने तथा गंदगी न जमा होने देने जैसी बातों पर लोग ध्यान देंगे तथा स्वास्थ्य के प्रति सचेत रहेंगे तो तंत्र-मंत्र से बांधनें की आवश्यकता नहीं पड़ेगी। बीमारियों खुद-ब-खुद नजदीक नहीं फटकेंगी, मक्खिंया व मच्छर किसी भी कथित तंत्र-मंत्र से अधिक खतरनाक है। 
 डॉ. मिश्र ने कहा ग्रामीणजनों से अपील है कि वे अपने गांव में अंधविश्वास न फैलने दे 
डॉ. मिश्र ने कहा कि सुनी सुनायी बातों के आधार पर अफवाहें एवं भ्रम फैलता है, वास्तव में ऐसा कुछ भी चमत्कार न हुआ है और न संभव है। इसलिये किसी भी को ग्रामीण को कथित जादू-टोने  के भ्रम व भय में नहीं पडना चाहिए। 
 डॉ. दिनेश मिश्र