अंधविश्वास,डायन (टोनही) प्रताड़ना एवं सामाजिक कुरीतियों के खिलाफ जनजागरण

I have been working for the awareness against existing social evils,black magic and witchcraft that is prevalent all across the country and specially Chhattisgarh. I have been trying to devote myself into the development of scientific temperament among the mass since 1995. Through this blog I aim to educate and update the masses on the awful incidents & crime taking place in the name of witch craft & black magic all over the state.

Sunday, June 7, 2026

 

# 30 सालों से चल रहा  अंधविश्वास व सामाजिक कुरीतियों के खिलाफ अभियान .
हजारों महिलाओं को टोनही प्रताड़ना से बचाया गया. डॉ दिनेश मिश्र 
@ अंध श्रद्धा निर्मूलन समिति के अध्यक्ष डॉ दिनेश मिश्र ने बताया कि सन 1995 में अंधविश्वास एवं सामाजिक कुरीतियों के खिलाफ कार्य करने के लिए कोई नारी टोनही(डायन )नही अभियान आरंभ किया गया था. जिसको  अब तीस वर्ष इस दिसंबर में हो चुके हैं, उस समय जादू टोने के संदेह में महिला प्रताड़ना टोनही ,के शक में  महिलाओं पर होने वाले अत्याचार के मामले प्राय रोज ही आते थे तब उस समय यह महसूस किया   गया कि  अंधविश्वास एवं कुरीतियों के खिलाफ कोई अभियान चले और लोगों में वैज्ञानिक चेतना जागृत हो सके . जादू टोने के संदेह में महिलाओं के साथ होने वाले अपराध एवं अत्याचार में कमी आए और  निर्दोष एवं मासूम लोगों को चमत्कार के नाम पर ठगने वाले लोगों को दंड मिले  साथ लोगों में वैज्ञानिक चेतना वैज्ञानिक जागरूकता का संचार हो. इन सब उद्देश्यों को लेकर सन 1995 में अंध श्रद्धा निर्मूलन समिति का गठन किया गया . तथा यह भी निर्णय लिया गया कि इस हेतु  शासकीय अशासकीय कोई भी अनुदान राशि न ली जाए .
 अंधविश्वास एवं टोनही प्रताड़ना के लिए जनजागरण के लिए डॉ दिनेश मिश्र के शैक्षणिक संस्थाओं में व्याख्यान एवं  कार्यशालाएं आयोजित की गई  सभी शासकीय महाविद्यालय, स्कूलों को इस जागरूकता कार्यक्रम से जोड़ने की  पहल की गई. सामाजिक  संगठनों के साथ कार्यक्रम आयोजित किए गए.साथ ही सरकार से   टोनही प्रताड़ना पर कानून बनाने की माँग निरंतर की गई. जिसके लिए लगातार ज्ञापन , व सभाएं आयोजित की गई. बाद में छत्तीसगढ़ बना  तत्कालीन  सरकार से मिल कर कानून बनाने की मांग रखते रहे .दस वर्षों के प्रयास से 2005 में छत्तीसगढ़ राज्य टोनही प्रताड़ना अधिनियम बनाऔर लागू हुआ .
 टोनही (डायन ) के संदेह में 3000 से अधिक मामलों में दखल दिया गया प्रताड़ितों से मुलाकात की गई उनके परिवार से मिले उन्हें इलाज उपलब्ध कराया गया उनके रहने पुनर्वास के लिए भी प्रयास किए गए तत्कालीन मुख्यमंत्री से मिलते रहे तथा उन्हें स्थानीय स्तर पर सामाजिक कुरीतियों की जानकारी देते रहे 
छत्तीसगढ़ के अतिरिक्त मध्यप्रदेश, ओड़िशा, असम, हिमाचल, राजस्थान,हरियाणा, कर्नाटक झारखंड सहित अनेक प्रदेशों में डॉ दिनेश मिश्र ने जागरूकता के लिए व्याख्यान, कार्यशालाएं की. असम में डायन प्रताड़ना के सम्बन्ध में कानून लागू करने के लिए असम के मुख्यमंत्री, विधानसभा यहां तक राष्ट्रपति महोदय तक पहल की. जिसका सकारात्मक प्रभाव हुआ. राजस्थान में महिला प्रताड़ना के एक बहुचर्चित मामले में  कार्यवाहीहुई.
आम लोगों की आस्था का लाभ उठा करके उनके साथ ठगी करने वाले  ठगों के खिलाफ भी अभियान चलाया गया जिनकी समय-समय पर न केवल उनकी की पोल खोली गई बल्कि उन्हें कानून के हवाले भी किया गया 
डॉ दिनेश मिश्र की 5000 से अधिक गांव में सभाएं ली गई लाखों ग्रामीणों से संपर्क एवं जागरूकता अभियान चलाया गया एनएसएस और एनसीसी के कैंपों और विश्व विश्वविद्यालय में जाकर वैज्ञानिक जागरूकता के संबंध में व्याख्यान आयोजित किए गए.
अंधविश्वास के खिलाफ इस अभियान में सामाजिक पर्वों में आयोजन होते रहते हैं . हरेली की रात ग्रामीण अंचल का भ्रमणऔर गांवों में सभाएं, रक्षाबंधन में प्रताड़ित महिलाओं से राखी बंधवा कर उन्हें संरक्षण, गणतंत्र दिवस पर उन महिलाओं का सम्मान , होली में अंधविश्वासो जैसे टोनही प्रताड़ना, बलि प्रथा , सामाजिक बहिष्कार, दहेज प्रथा, आदि की होली जलाने जैसे अभियान आयोजित किए गए. कोरोना काल में लोगों को शी उपचार के लिए प्रेरित किया गया.
अंधविश्वास से निर्मूलन से संबंधित किताबें किताबें प्रकाशित की गई पंपलेट प्रकाशित किए गए और गांव-गांव में बांटे गए.
 झाड़ फूंक से विभिन्न बीमारियों  के  चमत्कारिक उपचार का दावा कर ठगी करने वाले लोगों के प्रति ग्रामीणों को जागरूक किया गया.
अंधविश्वास के प्रति जागरूकता के लिए डॉ दिनेश मिश्र ने 7 किताबें लिखीं जो स्कूलों, ग्रामों में वितरित की जाती हैं. विभिन्न समाचार पत्रों में 20हजार से अधिक लेख प्रकाशित हुए हैं . साथ ही भारत सहित कुछ विदेशी विश्वविद्यालयो में उनके इस अभियान व कार्य पर चर्चा, थीसिस में उल्लेख हुआ है 
पुलिस ट्रेनिंग स्कूल,माना, चंद्रखुरी में व्याख्यान,  छत्तीसगढ़ राज्य विधिक सेवा आयोग द्वारा जिला न्यायालय के माध्यम से व्याख्यान संपन्न हुए हैं.
वर्तमान में एक और सामाजिक बुराई सामाजिक बहिष्कार पर भी जागरूकता , दौरे, कानून बनाने को लेकर  निरंतर कार्य जारी है. 
सामाजिक कुरीतियों के निर्मूलन के संबंध में यह अभियान एक मिसाल बन चुका है

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