अंधविश्वास,डायन (टोनही) प्रताड़ना एवं सामाजिक कुरीतियों के खिलाफ जनजागरण

I have been working for the awareness against existing social evils,black magic and witchcraft that is prevalent all across the country and specially Chhattisgarh. I have been trying to devote myself into the development of scientific temperament among the mass since 1995. Through this blog I aim to educate and update the masses on the awful incidents & crime taking place in the name of witch craft & black magic all over the state.

Sunday, June 7, 2026

 #*छत्तीसगढ़ राज्य टोनही प्रताड़ना निवारण अधिनियम, 2005 और डॉ. दिनेश मिश्र*


वरिष्ठ नेत्र विशेषज्ञ एवं सामाजिक कार्यकर्ता डॉ. दिनेश मिश्र ने छत्तीसगढ़ राज्य टोनही प्रताड़ना निवारण अधिनियम, 2005 की परिकल्पना और उसे साकार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

उन्होंने वर्ष 1995 से ही छत्तीसगढ़ अंचल में "कोई नारी टोनही नहीं" अभियान आरंभ किया। ग्रामीण क्षेत्रों का लगातार दौरा किया, प्रताड़ित महिलाओं और उनके परिजनों से भेंट की तथा इस सामाजिक कुरीति के विरुद्ध जन-जागरूकता फैलाने और सक्षम कानून बनवाने की पहल की।

*कानून निर्माण की दिशा में डॉ. मिश्र के प्रमुख प्रयास:*

1.  *20 मई 2000*: मध्य प्रदेश मानव अधिकार आयोग के अध्यक्ष न्यायमूर्ति गुलाब गुप्ता से भेंट कर अविभाजित मध्य प्रदेश में कानून बनाने हेतु ज्ञापन सौंपा।

2.  *9 जुलाई 2001*: छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री श्री अजीत जोगी को टोनही प्रताड़ना के विरोध में कानून बनाने के लिए ज्ञापन दिया।

3.  *30 अगस्त 2001*: राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग के अध्यक्ष न्यायमूर्ति जे.एस. वर्मा से भेंट कर ज्ञापन प्रस्तुत किया तथा टोनही प्रताड़ना के एक गंभीर मामले की शिकायत की।

4.  *10 दिसंबर 2001*: छत्तीसगढ़ मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष न्यायमूर्ति के.एम. अग्रवाल से भेंट कर नवगठित छत्तीसगढ़ राज्य में टोनही प्रताड़ना विरोधी कानून बनाने हेतु ज्ञापन सौंपा।

5.  *20 दिसंबर 2002*: मुख्यमंत्री श्री अजीत जोगी को प्रदेश में डायन प्रताड़ना विरोधी अधिनियम बनाने हेतु पुनः ज्ञापन दिया।

6.  *31 दिसंबर 2003*: तत्कालीन मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह से भेंट कर इस कानून के संबंध में चर्चा की और ज्ञापन सौंपा।

7.  *28 जनवरी 2004*: राष्ट्रपति डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम से भेंट कर डायन एवं टोनही प्रताड़ना निवारण अधिनियम बनाने हेतु ज्ञापन दिया।

8.  *24 सितंबर 2004*: महिला एवं बाल विकास विभाग की कार्यशाला में डायन/टोनही प्रताड़ना निवारण अधिनियम की अनिवार्यता पर व्याख्यान दिया।

9.  *18 दिसंबर 2004*: छत्तीसगढ़ राज्य महिला आयोग की बैठक में कानून बनाने के सुझाव और घटनाओं के आँकड़े प्रस्तुत किए। साथ ही शासन को विधेयक का प्रारूप भी भेजा।

10. *जुलाई 2005*: राज्य के सभी विधायकों से व्यक्तिगत भेंट कर एवं लिखित ज्ञापन देकर विधानसभा में प्रस्तुत होने वाले विधेयक का समर्थन करने का अनुरोध किया।

*अधिनियम पारित होना और बाद का कार्य*  
30 सितंबर 2005 को छत्तीसगढ़ राज्य टोनही प्रताड़ना निवारण अधिनियम, 2005 छत्तीसगढ़ विधानसभा में पारित हुआ। 

अधिनियम पारित होने के पश्चात डॉ. मिश्र ने गाँव-गाँव जाकर इस कानून का प्रचार-प्रसार किया। सभाओं और निरंतर दौरों के माध्यम से ग्रामीणों से मिलते रहे।

छत्तीसगढ़ सरकार ने अंधविश्वास एवं सामाजिक कुरीतियों के उन्मूलन के लिए इस महत्वपूर्ण अधिनियम को बनाने में योगदान देने पर डॉ. दिनेश मिश्र को राज्य अलंकरण "पंडित रविशंकर शुक्ल सम्मान" से सम्मानित किया। 7 नवंबर 2006 को राज्योत्सव में तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम ने उन्हें यह सम्मान प्रदान किया। छत्तीसगढ़ राज्य महिला आयोग ने भी अपने स्थापना दिवस पर डॉ. दिनेश मिश्र को सम्मानित किया.

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