अंधविश्वास,डायन (टोनही) प्रताड़ना एवं सामाजिक कुरीतियों के खिलाफ जनजागरण

I have been working for the awareness against existing social evils,black magic and witchcraft that is prevalent all across the country and specially Chhattisgarh. I have been trying to devote myself into the development of scientific temperament among the mass since 1995. Through this blog I aim to educate and update the masses on the awful incidents & crime taking place in the name of witch craft & black magic all over the state.

Thursday, March 15, 2012

DELIVERING LECTURE  ON  WITCHCRAFT (TONHI PRATADNA) AT SWAMI SWARUPANAND COLLEGE BHILAI,  IN NATIONAL WORKSHOP ON 2ND MARCH

Wednesday, March 14, 2012

जादू टोने के संदेह में वृद्ध दंपत्ति की हत्या निंदनीय डॉ.दिनेश मिश्र

जादू टोने  के संदेह  में वृद्ध  दंपत्ति  की हत्या   निंदनीय  .   पिछले रविवार ११ मार्च को  बलरामपुर जिले   केग्राम खोख्रापारा  में भीखू कोरवा  उसकी पत्नी फूल्मानिया  की  की हत्या ग्रामीणों  ने भरी सभा में डंडे से पीट पीट कर  जादू टोने के संदेह में कर दी  बाद में ग्रामीणों ने उनके शवों को दफना भी दिया ,जादू टोने की मान्यता  एक  अन्धविश्वास  है ,किसी भी व्यक्ति की जान  लेना आपराधिक ,तथा अमानवीय है ,ग्रामीणों को ऐसे  किसी भी अन्धविश्वास में नहीं पड़ना  चाहिए हम ग्राम खोख्रापारा जाकर अन्धविश्वास के खिलाफ जनजागरण कर ग्रामीणों को समझायेंगे . डॉ.दिनेश मिश्र

Wednesday, March 7, 2012

.डॉ.दिनेश मिश्र .dr.dinesh mishra


सामाजिक अन्धविश्वासो एवंम कुरीतियों का प्रतीकात्मक होलिका दहन


सामाजिक    अन्धविश्वासो  एवंम कुरीतियों का  प्रतीकात्मक  होलिका दहन  . विभिन्न सामाजिक  अन्धविश्वासो  एवं   कुरीतियों   जैसे  टोनही  प्रताड़ना  ,जादू  टोना  , झाड़   फूँक  ,,सती प्रथा  ,,तंत्र  मंत्र  ,,बलीप्रथा  ,दहेज़  प्रथा  , का  प्रतीकात्मक  होलिका  दहन  7 मार्च को   संध्या  6.30 बजे  महाकोशल कला  वीथिका   परिसर  में आयोजित  किया गया गुलाल लगा कर सूखी होली खेली गयी    .डॉ.दिनेश  मिश्र .

Tuesday, March 6, 2012

होली पर आँखों व अन्य संवेदनशील अंगों को बचा कर रंग खेला जाना चाहिए

होली  पर आँखों व अन्य संवेदनशील अंगों  को बचा कर रंग खेला जाना चाहिए .पहले होली प्राकृतिक रंगों से खेली जाती थी ,जो फूलों ,पत्तियों ,जड़ों ,व बीजों  से तैयार रंगों से खेली जाती थी ,जो शरीरके लिए हानिकारक नहीं थे .आजकल बाजार में उपलब्ध रंग ,गुलाल कृत्रिम ,रासायनिक पदार्थों से बनते है ,ये केमिकल शरीर की त्वचा ,पलकों ,आँखों पर दुष्प्रभाव डालसकते है .जिससे आँखों  व चेहरे में जलन ,खुजलाहट ,सूजन,दाने आना ,एलर्जी ,होना आदि प्रतिक्रिया हो सकती है ,रंग ,गुलाल में मिली गयी अभ्रक ,व मिटटी ,व रेत,से आँखों ,त्वचा में खरोंच हो सकती है ,इसलिए आवश्यक है कि आँखों में सुखा रंग ,गुलाल जाने से बचाया जावे .आंख के अन्दर रंग ,गुलाल जाने पर आँखों को रगड़े नहीं ,बल्कि उसे धीरे से निकालने कि कोशिश करें सादे पानी से आँखों को धो ले ,सुखा व खुरदरा  रंग आँखों कि कोर्निया में अल्सर बना सकता ,वाही रंग ,व पानी के गुब्बारे भी गंभीर चोट पंहुचा सकते है , होली सावधानी से खेले . होली कि शुभकामनाये . डॉ.दिनेश मिश्र .

Monday, March 5, 2012

सामाजिक अन्धविश्वासो एवंम कुरीतियों का प्रतीकात्मक होलिका दहन

सामाजिक    अन्धविश्वासो  एवंम कुरीतियों का  प्रतीकात्मक  होलिका दहन  . विभिन्न सामाजिक  अन्धविश्वासो  एवं   कुरीतियों   जैसे  टोनही  प्रताड़ना  ,जादू  टोना  , झाड़   फूँक  ,,सती प्रथा  ,,तंत्र  मंत्र  ,,बलीप्रथा  ,दहेज़  प्रथा  , का  प्रतीकात्मक  होलिका  दहन  7 मार्च को   संध्या  6.00 बजे  महाकोशल कला  वीथिका   परिसर  में आयोजित  है ,आप सभी  आमंत्रित  है  .डॉ.दिनेश  मिश्र .

Thursday, March 1, 2012

2  मार्च  को  भिलाई    के   स्वामी   स्वरूपानंद       इंस्टिट्यूट    ऑफ़  एजुकेशन     में  आयोजित  राष्ट्रीय  कार्यशाला  में  महिला     उत्पीडन  एवं  टोनही  प्रताड़ना   विषय  पर  व्याख्यान  देना  है    .