अंधविश्वास,डायन (टोनही) प्रताड़ना एवं सामाजिक कुरीतियों के खिलाफ जनजागरण

I have been working for the awareness against existing social evils,black magic and witchcraft that is prevalent all across the country and specially Chhattisgarh. I have been trying to devote myself into the development of scientific temperament among the mass since 1995. Through this blog I aim to educate and update the masses on the awful incidents & crime taking place in the name of witch craft & black magic all over the state.

Sunday, October 11, 2020

 












Five women in  katihar, Bihar ,branded as witches were thrashed,  paraded ,forced to cosume faeces and urine.  Dr. Dinesh Mishra

 Five women in Bihar ,district Katihar were allegedly branded as witches were thrashed ,paraded,&forced to consume faeces & urine  by a group of people.I strongly condemn this incidence. This is very inhuman and barbaric which needs strong legal action on all acussed.

 This incidence happened  at khaira village under the muffassil Police Station of katihar district in  Bihar on 20 september.

All Five women of the same family at a place in village when they were allegedly caught by angry villagers on suspicion of being involved in black magic. They were thrashed,  and paraded  in the village.
 
This recent incidence of women atrocities in khaira  has put humanity to shame. 

 Dr. Dinesh mishra said  This happened when India is busy in fighting against COVID 19 pandemic and country is under lockdown. 
According to local media reports, the incident took place After the Six years old girl fell sick 1month ago. After  public rituals, witch doctors blamed those women for  illnesses .They also alleged that the women practised black magic.
  Soon after a village meeting was held where  more than 100 villagers allegedly thrashed those five women & forced them to drink urine, and then paraded them naked across the village. 

Local police lodged a case and arrested 2 people .
Dr. Dinesh Mishra President of Andh shraddha Nirmulan samiti highly condemned this act .He said, There is no existence of black magic,these women were tortured due to superstition.  Government should take strong action against all  acussed.  We will visit the village and arrange awareness campaign in this area after lockdown period.   

 Dr. Dinesh Mishra .  President Andh Shraddha Nirmulan Samiti.(A voluntary organization working against witchcraft & superstition)
Mob:9827400859


23:17 (8 minutes ago)
 one woman in bardhman ,west bengal ,branded as witch was thrashed,  and paraded.  Dr. Dinesh Mishra

 One  women in West Bengal district East Bardhman was allegedly branded as a witch  thrashed and parade by a group of people. I strongly condemn this incidence. This is a very barbaric and inhuman act which needs a strong legal action on all the acussed of such act.

This incidence happened  on Sunday in a tribal village  of district east  bardhman.

Budhin baski a tribal  woman was preparing food for her family,  at their house in village ,when she was allegedly caught by angry villagers on suspicion of being involved in black magic. They were thrashed,  and paraded  in the village and took her in mansa devi temple her both arms were tied up and were forced to leave village.
  Dr. Dinesh mishra said  This happened when India is busy in fighting against COVID 19 pandemic and many regions of country is under lockdown.when local police went in the village to  arrest the acussed. Mob attacked on police force with arrows and then police used  tears gas and released the victim.  Police have been arrested 3 persons.
Dr. Dinesh Mishra President of Andh shraddha Nirmulan samiti highly condemned this act .He said, There is no existence of black magic,this woman was tortured due to superstition.  Government should take strong action against all  acussed.  We will visit the village and arrange awareness campaign in this area after lockdown period.   

 Dr. Dinesh Mishra .  President Andh Shraddha Nirmulan Samiti.(A voluntary organization working against witchcraft & superstition)

Mob:9827400859 

Tuesday, August 4, 2020

# बकरीद पर मेमने को जरूरतमंद परिवार को दान,केक काट कर  मनाने की सफल पहल. डॉ दिनेश मिश्र # @अपील रंग ला रही .
 #    ईदुज्जुहा(बकरीद) में जीवित प्राणी की कुर्बानी देने के बदले केक काटकर  धार्मिक रस्म अदा  करने की, डॉ  दिनेश मिश्र  की अपील का अब धीरे धीरे असर होने लगा है. असम में एक विज्ञान शिक्षक ने अपने मेमने  को एक जरूरतमंद परिवार को दान दिया कि वे उसका पालन करेंगे और उन्होंने इस त्याग के साथ ईद मनाई ,वही इस बार  अनेक स्थानों से पशु की कुर्बानी के बदले केक काट कर बकरीद मनाने के उदाहरण सामने आये हैं   .
# अंधश्रद्धा निर्मूलन समिति के अध्यक्ष डॉ दिनेश मिश्र ने बताया  असम के धुबरी में रहने वाले विज्ञान शिक्षक श्री अहमद हुसैन ने बकरीद में स्वयं के द्वारा पाले हुए  मेमने  की कुर्बानी देने के बदले  स्थानीय जरूरतमंद परिवार को दान  किया . वहीं कुछ अन्य स्थानों से भी सकारात्मक खबरे आयी है जिनमें इस वर्ष मध्यप्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़, उत्तरप्रदेश, दिल्ली,    सहित अनेक प्रदेशों में यह पहल हुई .
 डॉ दिनेश मिश्र ने कहा   जन जागरूकता प्रयासों के चलते  देश के कुछ स्थानों से पिछले वर्ष वर्ष पहली बार  जीवित प्राणी की कुर्बानी देने के बदले  केक काटकर धार्मिक रस्म अदा करने के इको फेंडली ईद मनाने के  उदाहरण सामने आए.  जो इस बार बढ़े हैं .
    ईदुज्जुहा (बकरीद) पर विभिन्न जानवरों की कुर्बानी दिये जाने के मामले सामने आए हैं,
अंधश्रद्धा निर्मूलन समिति के अध्यक्ष डॉ दिनेश मिश्र ने कहा देश के अनेक राज्यों में पशुबलि के निषेध के सम्बंध में कानून बने हुए हैं पर उनका  पालन न होने से लाखों निर्दोष मासूम पशुओं की कुर्बानी /बलि दी जाती है ।  जबकि सभी धर्म प्रेम,अहिंसा की शिक्षा देते हैं ,अपनी मनोकामनाओं  की पूर्ति के लिए किसी दूसरे प्राणी की जान लेना ठीक नहीं है।
डॉ दिनेश मिश्र ने कहा पिछले अनेक वर्षों से विभिन्न धार्मिक अवसरों पर पशु की कुर्बानी, पशु वध/बलि की  क्रूर परम्परा के विरोध में जनजागरण कर रही हैं पिछले वर्ष महाराष्ट्र के कोराडी के मंदिर में,तथा कुछ अन्य स्थानों में नवरात्रि में  बलि प्रथा बंद हुई है ,वहीं बकरीद में भी अनेक स्थानों में मुस्लिम धर्मावलंबियों ने कुर्बानी की प्रथा का परित्याग किया ,पिछले कुछ समय से अन्य देशों के साथ भारत में भी लखनऊ आगरा ,मेरठ मुजफ्फरपुर,  रायपुर, जयपुर, उदयपुर, बालाघाट, शिवपुरी 
सहित अनेक स्थानों में जन जागरण के प्रयासों से लोगों ने ईदुज्जुहा(बकरीद) में बकरे के स्थान पर केक काटा,कुछ स्थानों पर तो लोगों ने केक पर ही बकरे का चित्र लगाया और बकरा केक काट कर न केवल सांकेतिक रूप से धार्मिक रस्म अदा की ,बल्कि निर्दोष प्राणियों की रक्षा भी की  डॉ दिनेश मिश्र ने कहा महात्मा बुद्ध और महावीर स्वामी भी अहिसा के सिद्धांत को प्रचारित करते रहे  महावीर स्वामी ने जियो और जीने दो के सिद्धांत को प्रमुखता दी है, वही अपने उद्धरणों में महात्मा बुद्ध ने कहा है कि मारने वाले से बचाने वाला बड़ा होता है  यदि हम किसी को जीवन नहीं दे सकते ,तो हमें किसी का जीवन लेने का अधिकार नहीं है । 
डॉ दिनेश मिश्र ने कहा है कुर्बानी का अर्थ त्याग करना होता है ,अपनी ओर से किसी जरूरतमंद को आवश्यकतानुसार   नगद राशि,दवा,कपड़े ,किताबें ,स्कूल फीस आदि दान कर भी आत्मसंतुष्टि पाई जा सकती है,साथ ही  देश के अन्य प्रदेशों की तरह    किसी जिंदा प्राणी  को काट कर उसकी जान कुर्बान करने के स्थान पर केक काट कर न केवल धार्मिक रस्म अदा करने बल्कि निर्दोष प्राणी की जान बचाने की पहल  की जा सकती है और आगामी वर्षों में ऐसे प्रगतिशील कदमों में और भी अधिक परिवारों के जुड़ने का विश्वास है.
डॉ दिनेश मिश्र 
अध्यक्ष ,अंधश्रद्धा निर्मूलन समिति

Dr.Dinesh Mishra dr.dineshmishra@gmail.com

AttachmentsSun, 26 Jul, 13:06 (9 days ago)
to sunilDESHBANDHUrashmicitydeskraipurBrahmaveerSandeepAbhishekUTTAMGurmeetvisionnewsservicerns_newsKamlakar
# ईदुज्जुहा(बकरीद) में जीवित प्राणी की कुर्बानी देने के बदले केक काटकर  धार्मिक रस्म अदा  करें   डॉ. दिनेश मिश्र 
 @ तेलंगाना हाई कोर्ट ने ऊंट की कुर्बानी पर रोक लगाई 
# अंधश्रद्धा निर्मूलन समिति के अध्यक्ष डॉ दिनेश मिश्र ने बताया    तेलंगाना सरकार ने एक आदेश जारी किया है, कि तेलंगाना में ईदुज्जुहा( बकरीद) में  ऊंटों को काटने सहित अन्य किसी भी मकसद से लाना गैरकानूनी है और कानून तोड़ने वालों पर मामला दर्ज कर कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी. वही  दूसरी ओर  जन जागरूकता प्रयासों के चलते  देश के कुछ स्थानों से पिछले वर्ष जीवित प्राणी की कुर्बानी देने के बदले  केक काटकर धार्मिक रस्म अदा करने के इको फेंडली ईद मनाने के  उदाहरण सामने आए.  
 डॉ दिनेश मिश्र ने बताया दरअसल, तेलंगाना हाई कोर्ट में  ईदुज्जुहा(बकरीद) के दौरान ऊंटों की कुर्बानी देने पर रोकथाम की मांग वाली एक जनहित याचिका दायर की गई थी।  इस जनहित यहिका पर सुनवाई करने के बाद आदेश जारी करते हुए कोर्ट ने कहा  कि परंपरा के नाम पर ऊंट को न मारा जाएं. इसके पहले महाराष्ट्र राजस्थान, उत्तराखंड, उत्तरप्रदेश में भी धार्मिक अवसरों पर विभिन्न पशुओं की कुर्बानी दिये जाने के सम्बंध में अलग अलग समय पर रोक के आदेश जारी किए है ,तेलंगाना ,राजस्थान, उत्तरप्रदेश, में कुछ स्थानों में ईदुज्जुहा (बकरीद) पर विभिन्न जानवरों की कुर्बानी दिये जाने के मामले सामने आए हैं, उत्तराखंड में उच्च न्यायालय ने 2018 में बकरीद सहित सभी धार्मिक आयोजनों में होने वाली कुर्बानी/पशुवध  सार्वजनिक स्थानों  में किये जाने पर रोक लगा दी थी ,उत्तरप्रदेश में  सन 2017 में गाय, बैल,भैस,ऊंट,आदि जानवरों की कुर्बानी पर निषेध जारी किया था,वहीं महाराष्ट्र हाई कोर्ट ने भी 2018 में बकरीद के पहले ही विभिन्न पशुओं भेड़,बकरी, पशुओ के कुर्बानी के लिए होने वाले  धड़ल्ले से जारी होने वाले निर्यात, लाइसेंस के खिलाफ  याचिका दायर हुई थी ,
अंधश्रद्धा निर्मूलन समिति के अध्यक्ष डॉ दिनेश मिश्र ने कहा देश के अनेक राज्यों में पशुबलि के निषेध के सम्बंध में कानून बने हुए हैं पर उनका  पालन न होने से लाखों निर्दोष मासूम पशुओं की कुर्बानी /बलि दी जाती है ।  जबकि सभी धर्म प्रेम,अहिंसा की शिक्षा देते हैं ,अपनी मनोकामनाओं  की पूर्ति के लिए किसी दूसरे प्राणी की जान लेना ठीक नहीं है।
डॉ दिनेश मिश्र ने कहा पिछले अनेक वर्षों से पशु की कुर्बानी, पशु वध/बलि की  क्रूर परम्परा के विरोध में जनजागरण कर रही हैं पिछले वर्ष महाराष्ट्र के कोराडी के मंदिर में,तथा कुछ अन्य स्थानों में  बलि प्रथा बंद हुई है ,वहीं बकरीद में भी अनेक स्थानों में मुस्लिम धर्मावलंबियों ने कुर्बानी की प्रथा का परित्याग किया ,पिछले वर्ष कुछ अन्य देशों के साथ भारत में भी लखनऊ आगरा ,मेरठ मुजफ्फरपुर,सहित अनेक स्थानों में जन जागरण के प्रयासों से लोगों ने ईदुज्जुहा(बकरीद) में बकरे के स्थान पर केक काटा,कुछ स्थानों पर तो लोगों ने केक पर ही बकरे का चित्र लगाया और बकरा केक काट कर न केवल सांकेतिक रूप से धार्मिक रस्म अदा की ,बल्कि निर्दोष प्राणियों की रक्षा भी की  महात्मा बुद्ध और महावीर स्वामी भी अहिसा के सिद्धांत को प्रचारित करते रहे  महावीर स्वामी ने जियो और जीने दो के सिद्धांत को प्रमुखता दी है, वही अपने उद्धरणों में महात्मा बुद्ध ने कहा है कि मारने वाले से बचाने वाला बड़ा होता है  यदि हम किसी को जीवन नहीं दे सकते ,तो हमें किसी का जीवन लेने का अधिकार नहीं है । 
डॉ दिनेश मिश्र ने कहा है कुर्बानी का अर्थ त्याग करना होता है ,अपनी ओर से किसी जरूरतमंद को आवश्यकतानुसार   नगद राशि,दवा,कपड़े ,किताबें ,स्कूल फीस आदि दान कर भी आत्मसंतुष्टि पाई जा सकती है,साथ ही  देश के अन्य प्रदेशों की तरह    किसी जिंदा प्राणी  को काट कर उसकी जान कुर्बान करने के स्थान पर केक काट कर न केवल धार्मिक रस्म अदा करने बल्कि निर्दोष प्राणी की जान बचाने की पहल की जा सकती है .
डॉ दिनेश मिश्र 
अध्यक्ष ,अंधश्रद्धा निर्मूलन समिति
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Sunday, May 10, 2020

# सामाजिक बहिष्कार का एक और मामला 14 परिवार बहिष्कृत डॉ दिनेश मिश्र
@ सामाजिक बहिष्कार मानवाधिकार के खिलाफ,
 @ अंधश्रद्धा निर्मूलन समिति के अध्यक्ष डॉ. दिनेश मिश्र ने बताया कि सामाजिक बहिष्कार कर हुक्का पानी बन्द करने का राजनांदगांव में एक और बड़ा मामला सामने आया है जिसमें  समाज के ठेकेदारों ने 14 परिवारों को समाज से बहिष्कृत कर दिया ,और 7 लाख जुर्माने की मांग की.उन्होंने  इस मामले की शिकायत शासन से करते हुए पीड़ित परिवारों को न्याय दिलाने की मांग की है तथा सरकार से सामाजिक बहिष्कार के विरोध में सक्षम कानून बनाने की मांग की है.  डॉ .दिनेश मिश्र ने बताया कि डोंगरगढ़. विकासखंड के ग्राम पंचायत मुड़पार में ग्राम प्रमुखों ने 14 परिवारों को सिर्फ इसलिए बहिष्कृत कर दिया कि उन्होंने उनकी बात माने बगैर उप सरपंच चुनाव में भाग लिया। अपना प्रत्याशी खड़ा किया। हालांकि उन्हें हार का सामना करना पड़ा किंतु हार होते ही सभी 14 परिवारों को बहिष्कृत कर दिया गया।

उन्हें जानकारी मिली है कि मामला कुछ इस प्रकार है कि गांव के कुछ  प्रमुख  व्यक्तियों ने पंचायत चुनाव में  उप सरपंच चुनाव के लिए अपना एक प्रत्याशी खड़ा किया तथा उसे ही निर्विरोध जिताने कमर कस ली किंतु गांव में दूसरे पक्ष ने उपसरपंच के लिए विद्याबाई चौधरी को चुनाव में उतारा था। डॉ. मनमोहन यदु व विद्याबाई चौधरी के बीच चुनाव हुआ। विद्या बाई को हार का सामना करना पड़ा।24 फरवरी को हुए चुनाव के तत्काल बाद गांव के प्रमुखों के रूप में  दबंगों ने सभी 14 परिवारों को जिन्होंने विद्याबाई चौधरी को सहयोग किया था। गांव  से सामाजिक रुप से बहिष्कृत कर दिया तथा इन्हें सात लाख रुपए का जुर्माना देने पर ही गांव में शामिल करने का फरमान जारी कर दिया डर कर तीन परिवार तीरुराम कदम तिलक कंवर व भारती ठाकरे ने जुर्माना भरकर अपनी वापसी करा ली किंतु 11 परिवार भी गांव से बहिष्कृत है
बहिष्कृत परिवार जिनमें ज्ञान चंद साहू, हीरा चौधरी, अमित देशमुख, छबिलाल करसे, माया चौधरी, विद्याबाई चौधरी, रामलाल कवंर, आसाराम कंवर, राजेश चौधरी और स्वयं सरपंच लताबाई ठाकरे ग्राम से बहिष्कृत हो चुके हैं। इन्होंने जिला डोंगरगढ़ थाने में 27 अप्रैल को न्याय की गुहार लगाई अभी तक उन्हें न्याय नही मिल पाया है . 
डॉ दिनेश मिश्र ने कहा इसी प्रकार की एक घटना की जानकारी सप्ताह भर पहले राजनांदगांव जिले के ही  चिखलाकसा के दानीटोला गांव से आई थी , सामाजिक पंचायत को चंदा नही देने के कारण 4 गरीब  परिवारों का सामाजिक बहिष्कार कर उनका हुक्का पानी बन्द कर दिया गया है.समिति  ने इस मामले की शिकायत जिला कलेक्टर से की है। 
डॉ दिनेश मिश्र ने कहा सामाजिक बहिष्कार करना, हुक्का पानी बन्द करना एक सामाजिक अपराध है तथा यह किसी भी व्यक्ति के संवैधानिक एवम मानवाधिकारों का हनन है ,प्रशासन को इन दोनों ही मामलों पर कार्यवाही कर पीड़ितों को न्याय दिलाने की आवश्यकता है साथ ही सरकार को सामाजिक बहिष्कार के  सम्बंध में एक सक्षम कानून बनाना चाहिए.
  डॉ दिनेश मिश्र 
# सामाजिक बहिष्कार के मामले पर कार्यवाही हो. डॉ. दिनेश मिश्र. @ ग्राम दानीटोला का मामला.
 .# अंधश्रद्धा निर्मूलन समिति के अध्यक्ष डॉ.दिनेश मिश्र ने बताया कि सामाजिक बहिष्कार की प्रथा ग्रामीण अंचल में अब भी जारी है जिसमें ग्रामों में समाज के नाम पर परिवारों का बहिष्कार कर उनका हुक्का पानी बन्द कर दिया है जिससे पीड़ित ग्रामीणों के समक्ष जीवन यापन की समस्या उत्पन्न हो गयी है.डॉ. मिश्र ने इस मामले की जांच कर दोषियों पर कड़ी कार्यवाही करने की मांग की है,सरकार से सामाजिक बहिष्कार के विरोध में सक्षम कानून बनाने की  मांग  की है. डॉ दिनेश मिश्र ने जानकारी दी कि  राजनांदगांव जिले के डोंगरगांव थाना क्षेत्र के चिखला कसा के ग्राम दानीटोला की घटना है  जहाँ गाँव के दबंग लोगों  ने चंदा नही देने पर 4 परिवारों के विरूद्ध हुक्का पानी बन्द करने का फरमान जारी कर दिया है ,आश्चर्य की बात तो यह भी है कि समाज के मुखियाओं ने हुक्का पानी बंद करने के सार्वजनिक फरमान के साथ गाँव के कोटवार को इस अवैध फरमान की निगरानी की जिम्मेदारी भी दे रखे है, ताकि इन परिवारों को ग्रामीण सहयोग भी ना कर पाएतथा यह भी कहलाया है कि किसी ग्रामीण या दुकानदार के द्वारा सहयोग करते पाए गए, तो सहयोग करने वाले उन परिवारों का भी हुक्का पानी बंद कर दिया जावेगा।
डॉ दिनेश मिश्र ने बताया डोंगरगांव थाना क्षेत्र अंतर्गत ग्राम पंचायत चिखलाकसा अंतर्गत आश्रित ग्राम दानीटोला में ग्रामीणों ने बैठक लेकर ज्योति कलश भवन बनाये जाने का निर्णय लिया  इस भवन निर्माण के लिए ग्रामीणों ने सभी ग्रामीणों से ही चंदा लेकर भवन का निर्माण करने  हेतु सभी घरों से अनिवार्य ढंग से 600 रुपये चंदा देने का भी फरमान जारी कर दिया जिस पर. ग्राम  के अनेक सक्षम ग्रामीण जन सहयोग देने तैयार हो गए ,लेकिन ग्राम के ही चार परिवारो ने देश मे आये माहमारी कोरोना  के दौरान आर्थिक तंगी होने का हवाला देकर चंदा दे पाने में असमर्थता प्रकट की,  जिस पर कुछ ग्रामीणों  ने  समूचे गांव में कोटवार के माध्यम से मुनादी करके  चार ग्रामीणों  बिसाहू राम जोशी , देवालु राम रात्रे ,गंगाधर जोशी, व चंदन कुमार जांगडे को गाँव से बहिष्कृत करने का फरमान जारी कर दिया ।  ग्रामीणों ने इस मामले की शिकायत भी की है,जिसमें उन्होंने कहा है कि ग्राम में फरमान जारी करने के बाद  ही गाँव मे ही स्थित किराना दुकान वालो में से नरबद किराना दुकान , बंसी किराना व झाडू किराना दुकान के मालिकों ने सामान देने से मना कर दिए व बताया कि गाँव के मुखियाओं ने सामान देने से मना किया है इसीलिए वे सामान नही दे पाएंगे ।पीड़ितचारों परिवारों    ने थाना डोंगरगांव में लिखित शिकायत कर मामले की जांच कर कार्यवाही की  मांग की है.
अंधश्रद्धा निर्मूलन समिति के अध्यक्ष डॉ. दिनेश मिश्र ने कहा किसी भी व्यक्ति का सामाजिक बहिष्कार करना अनुचित तथा आपराधिक है सामाजिक बहिष्कार से मानवाधिकारों का हनन होता है ,शासन से इस मामले की जॉंच कर प्रताड़ित परिवारों को न्याय दिलाने की मांग की है ,साथ ही प्रदेश में सामाजिक बहिष्कार प्रतिषेध कानून बनाने की मांग की है. 
.डॉ दिनेश मिश्र
 ,अध्यक्ष अंधश्रद्धा निर्मूलन समिति  mobile. No.98274 00859. Email. dr.dineshmishra @gmail.com

# डायन के सन्देह में 3 महिलाओं के साथ मारपीट,कपड़े फाडे,बाल काटने,मैला ,पेशाब पिलाने की घटना शर्मनाक .
#बिहार मुजफ्फरपुर की घटना.
@ अंधश्रद्धा निर्मूलन समिति के अध्यक्ष डॉ.दिनेश मिश्र ने  बिहार के मुजफ्फपुर के हथौड़ी थाना क्षेत्र में 3 अधेड़ महिलाओं पर डायन के सन्देह में हुई प्रताड़ना की कड़ी निंदा करते हुए कहा है ,यह घटना सभ्य समाज के लिए अत्यंत शर्मनाक है.समिति की ओर से बिहार सरकार को पत्र लिख कर इस मामले में शामिल सभी दोषियो. को गिरफ्तार कर कड़ी कार्यवाही की जाने की मांग की गई है.
डॉ दिनेश मिश्र ने कहा मुजफ्फरपुर के हथौड़ी थाना क्षेत्रके ग्राम डकरामा में  3 महिलाओं को जादू टोना करने,डायन के सन्देह में रात भर पीटा गया,उनके कपड़े फाड़ दिए ,उनके बाल काट दिए,गए ,उन्हें जबरदस्ती मल तथा पेशाब पिलाई गयी ,इस घटना के बाद उक्त महिलाएं गांव छोड़कर जा चुकी है और मुजफ्फपुर के मेडिकल कॉलेज में भर्ती है  उक्त महिलाओं में से एक नए जानकारी दी है,उन्हें गांव के फुलवारी टोले के 25 लोगों ने पकड़ने का प्रयास किया जिससे बचने के लिए वे बहुत भागीं,पर लोगों ने उन्हें पकड़ लिया,श्याम साहनी के यहाँ ले गए,जहाँ उन्हें रात भर पीटते रहे,ब्लाउज़ फाड़ दिया,साड़ी फाड़ दी,और छाती पर बैठ कर मानव मल ,पेशाब पिलाई,और4 मई की सुबह  गाछी  में ले जाने व बाल काटने की शिकायत की है. मुजफ्फपुर के श्रीकृष्ण मेडिकल कॉलेज में भर्ती उनमे से एक महिला ने यह बी. बी. सी .को बताया है,उसका कहना है उसकी तबियत ठीक नही है शरीर में तकलीफ बहुत है ,,मैला खिलाने से उल्टी करते करते परेशान हो गयी हैं.वे सब लोग डरे हुए हैं और गांव जाने की हिम्मत नहीं कर पा रहे है.इस कारण उनका बयान भी नहीं हो पाया था. 
डॉ दिनेश मिश्र ने कहा जादू टोने का कोई अस्तित्व नहीं होता इसलिए जादू टोना करके किसी को बीमार करने के सन्देह में किसी भी महिला के साथ मारपीट करना, प्रताड़ित करना गलत,अमानवीय और आपराधिक है,कोई महिला डायन/टोनही नही होती ,डायन के सन्देह में इस प्रकार प्रताड़ित करने वाले सभी दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्यवाही करने की मांग बिहार सरकार को पत्र भेजकर की गई है.
डॉ दिनेश मिश्र 
अध्यक्ष अंधश्रद्धा निर्मूलन समिति  ,मोबाइल 9827400859