अंधविश्वास,डायन (टोनही) प्रताड़ना एवं सामाजिक कुरीतियों के खिलाफ जनजागरण

I have been working for the awareness against existing social evils,black magic and witchcraft that is prevalent all across the country and specially Chhattisgarh. I have been trying to devote myself into the development of scientific temperament among the mass since 1995. Through this blog I aim to educate and update the masses on the awful incidents & crime taking place in the name of witch craft & black magic all over the state.

Sunday, August 12, 2018

# भूत, प्रेत, टोनही का खौफ व भ्रम हटाने के लिए अंधश्रद्धा निर्मूलन समिति 11 अगस्त हरेली की रात भ्रमण करेगी
@बीमारियों से बचाव के लिए गांव को तंत्र, मंत्र से बांधने की बजाय स्वास्थ्य सुरक्षा के नियमों का पालन करें - डाॅ. दिनेश मिश्र
# अंधविश्वास, पाखंड व सामाजिक कुरीतियों के निर्मूलन के लिए कार्यरत संस्था अंधश्रद्धा निर्मूलन समिति के अध्यक्ष डाॅ. दिनेश मिश्र ने कहा अंधश्रद्धा निर्मूलन समिति हरेली पर 1 सप्ताह का विशेष जनजागरण अभियान चलाएगी, जिसमें जादू टोने के  संबंध में, टोनही प्रताडऩा ·के विरोध में जागरूक करने ग्राम सभा सरपंचों से टोनही प्रताडऩा के विरोध में शपथ, गांव के निर्जन स्थानों में रात्रिभ्रमण, स्कूल में व्याख्यान, अंधविश्वास पर पेंटिंग, प्रतियोगिता, पम्पलेट  वितरण  किया जाएगा टोनही प्रताडऩा के संबंध में जानकारी एवं जागरूकता बढ़ाने हेतु पोस्टर वितरित किए जायेंगे तथा यह पोस्टर प्रदेश की सभी ग्राम पंचायतों एवं सार्वजनिकस्थलों पर चस्पा किए जायेंगे।  
अंधश्रद्धा निर्मूलन समिति के अध्यक्ष डाॅ. दिनेश मिश्र ने कहा हरियाली के प्रतीक हरेली अमावस्या की रात को ग्रामीणजनों के मन से टोनही, भूत-प्रेत का खौफ हटाने के लिए समिति रात्रि भ्रमण कर ग्रामीणजनों से संपर्क करेगी। कोई नारी टोनही नहीं अभियान के अंतर्गत दुर्ग जिले के पाटन ब्लाॅक के ग्राम तेलीगुंडरा में ग्रामसभा आयोजित है। 
डाॅ. दिनेश मिश्र ने कहा अंचल में हरियाली अमावस्या (हरेली) के संबंध में काफी अलग अलग मान्यताएं हैं अनेक स्थानों पर इसे जादू-टोने से जोड़कर भी देखा जाता है, कहीं-कहीं यह भी माना जाता है कि इस दिन, रात्रि में विशेष साधना से जादुई सिद्वियां प्राप्त की जाती है जबकि वास्तव में यह सब परिकल्पनाएं ही हैं, जादू - टोने का कोई अस्तित्व नहीं है तथा कोई महिला टोनही नहीं होती। पहले जब बीमारियों व प्राकृतिक आपदाओं के संबंध में जानकारी नहीं थी तब यह विश्वास किया जाता था कि मानव व पशु को होने वाली बीमारियां जादू-टोने से होती है। बुरी नजर लगने से, देखने से लोग बीमार हो जाते है तथा इन्हें बचाव के लिए गांव, घर को तंत्र-मंत्र से बांध देना चाहिए तथा ऐसे में कई बार विशेष महिलाओं पर जादू-टोना करने का आरोप लग जाता है वास्तव में सावन माह में बरसात होने से वातावरण का तापमान अनियमित रहता है, उसम, नमी के कारण बीमारियों को फैलाने वाले कारकों बैक्टीरिया व कीटाणु अनुकूल वातावरण पाकर काफी बढ़ जाते है। गंदगी, प्रदूषित पीने के पानी, भोज्य पदार्थ के दूषित होने, मक्खियां, मच्छरो के बढने से बीमारियां एकदम से बढ़ जाती है। जिससे गांव गांव में आंत्रशोध, पीलिया, वायरल फिवर, मलेरिया के मरीज बढ़ जाते है तथा यदि समय पर ध्यान नहीं दिया गया हो तो पूरी बस्ती ही मौसमी संक्रामक रोगों की शिकार हो जाती है। वहीं हाल फसलों व पशुओं का भी होता है, इन मौसमी बीमारियों से बचाव के लिए पीने का पानी साफ हो, भोज्य पदार्थ दूषित न हो, गंदगी न हो, मक्खिंया, मच्छर न बढ़े,जैसी बुनियादी बातों पर ध्यान देने की आवश्यकता है। स्वास्थ्य संबंधी सावधानियां रखने से लोग पशु बीमारियों से बचे रह सकते है। इस हेतु किसी भी प्रकार के तंत्र-मंत्र से घर, गांव बांधने की आवश्यकता नहीं है। साफ-सफाई अधिक आवश्यक है, इसके बाद यदि कोई व्यक्ति इन मौसमी बीमारियों से संक्रमित हो तो उसे फौरन चिकित्सकों के पास ले जाये, संर्प दंश व जहरीले कीड़े के काटने पर भी चिकित्सकों के पास पहुंचे।
डाॅ. मिश्र ने कहा पिछले कुछ वर्षो से यह देखा जा रहा है कि हरेली अमावस्या को दिन में भी बच्चे व कई लोग जादू-टोने व नजर लगने से बचने के लिए नीम की टहनी, साइकिलों, रिक्शे व गाड़ियों में लगातार घूमते दिखाई देते है। तथा कुछ बच्चे नीम की पत्तियां लेकर स्कूल तक पहुंच जाते हैं पालकों व शिक्षकों को बच्चों को ऐसे अंधविश्वास से बचने की सलाह देना चाहिए। नीम की टहनी तोड़-तोड़कर वृक्ष को नुकसान पहुंचाने के बजाय घर के आसपास नीम के पौधे लगाये ताकि वातावरण शुद्ध हो। बीमारियों से बचने के लिए साफ-सफाई, पानी को छानकर, उबालकर पीने, प्रदूषित भोजन का उपयोग न करने तथा गंदगी न जमा होने देने जैसी बातों पर लोग ध्यान देंगे तथा स्वास्थ्य के प्रति सचेत रहेंगे तो तंत्र-मंत्र से बांधनें की आवश्यकता नहीं पड़ेगी। बीमारियों खुद-ब-खुद नजदीक नहीं फटकेंगी, मक्खिंया व मच्छर किसी भी कथित तंत्र-मंत्र से अधिक खतरनाक है साथ ही स्वास्थ्य शिविर एवं वृक्षारोपण कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है। 
डाॅ. मिश्र ने कहा हरेली अमावस्या पर भी अंधविश्वास, जादू-टोने, टोनही की मान्यता के विरोध में जरूरी चलाया जा रहा  ‘‘कोई नारी टोनही नहीं अभियान’’ जारी रहेगा। जिसमें टोनही, भूत-प्रेत का खौफ मिटाने के लिए व भ्रम दूर करने के लिए समिति के सदस्य रात्रि में भ्रमण कर ग्रामीणों से सम्पर्क कर भ्रम व अंधविश्वास दूर कर वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित करने का प्रयास करेंगे।

Sunday, July 22, 2018

भूत भगाने के नाम पर सिर एवं मुँह पर जूते पकड़कर चलाने एवं मारपीट के मामले 
डॉ. दिनेश मिश्र की पहल पर आसींद (राजस्थान) में महिलाओं पर होने वाली प्रताडऩा पर रोक

अंध श्रद्धा निर्मूलन समिति को अगस्त 2016 में जानकारी प्राप्त हुई कि राजस्थान के भीलवाड़ा से 20 कि. मी. दूर  ग्राम आसींद के बंक्या राणी मंदिर में हर शनिवार और रविवार को करीब 500 महिलाएँ भूत प्रेत बाधा से ग्रस्त होने के नाम पर झाड़-फूंक के लिए लायी जाती है, जिन्हें वहां का पुजारी (भोपा) मारता, पीटता है ,सर पर ,मुंह में जूते रखवा कर चलवाता है ,उसी गंदे जूते से उन पीडि़त महिलाओं को पानी पिलाया जाता है ,पीठ और सर के बल रेंग कर उन्हें 200 सीडिय़ों नीचे उतरा जाता है ,उनके कपडे फट  जाते ,हाथ पैर, सर और कोहनियों से खून बहने लगता है ,छह सात घंटे की यातना  से गुजरने के बाद ही उन्हें इस प्रताडऩा से मुक्ति मिलती है, हजारों अंधविश्वासी इस दृश्य को देखते रहते है कि इस ईलाज  से शायद कोई चमत्कार हो जाये और पीडि़ता की बीमारी दूर हो जाये एक विडम्बना यह कि प्रताडि़त महिलायें दर्द से चीखती ,चिल्लाती है पर उनकी कोई सुनवाई नहीं होती इस पर रोक नहीं लग पा रही है। यह जानकारी मिलने के पश्चात् समिति के अध्यक्ष डॉ. दिनेश मिश्र ने भीलवाड़ा के जिला कलेक्टर एवं पुलिस अधीक्षक को पत्र लिखकर इस कुरीति पर रोक लगाने की मांग की और कार्यवाही ना होने पर उन्होंने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष जस्टिस श्री एच. एल. दत्तु तथा महिला आयोग की अध्यक्ष श्रीमती ललिता कुमारमंगलम को पत्र लिखकर इसकी जानकारी दी और इस कुप्रथा को बंद करने की मांग की तथा लिखा कि वह स्वयं उसी स्थान पर जाकर इस कुरीति को रोकेंगे तथा वहां जन जागरण अभियान चलाया जाएगा तदुपरांत आसींद में मानव अधिकार आयोग एवं महिला आयोग द्वारा कार्यवाही हुई प्रारंभ हुई भीलवाड़ा के पुलिस अधीक्षक एवं जिलाधीश से ड्रग एंड मैजिक रेमेडी एक्ट के अंतर्गत दोषी भोपाओं (बैगाओं) पर कार्यवाही की मांग की गई। डॉ. दिनेश मिश्र की पहल के बाद उक्त मामले पर कार्यवाही आरंभ हुई तथा दो बैगाओं पर ड्रग एवं मेजिक रेमेडी एक्ट के अंतर्गत कार्यवाही की गई तथा सीढ़ीयों एवं मंदिर परिसर मेें सीसीटीवी कैमरे लगाये गये तथा महिलाओं की सुरक्षा के लिए पुलिस की व्यवस्था हुई ताकि महिलाओं को कोई भी व्यक्ति भूत उतारने जैसी घटनाओं और अंधविश्वास के नाम पर प्रताडि़त ना कर पाए। इसके उपरांत इसी वर्ष अप्रैल में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग सम्मुख पेशी में पुलिस अधीक्षक एवं जिला कलेक्टर की रिपोर्ट प्राप्त हुई की उक्त मंदिर परिसर में अब इस प्रकार की प्रताडऩा पर नियंत्रण कर लिया गया है। 
डॉ. दिनेश मिश्र ने कहा कि मानसिक रूप से असंतुलित और मनोरोग से ग्रसित महिलाओं को भूत, प्रेत ग्रस्त मानने एवं उन्हें भूत भगाने के नाम पर उन्हें शारीरिक एवं मानसिक रूप से प्रताडि़त करने का अंधविश्वास 21 वीं सदी में भी चरम सीमा पर है , यह परंपरा सभ्य समाज के लिए शर्मनाक है और अति निंदनीय है। देश में अनेक स्थानों में  ऐसे प्रकरण सामने आ रहे हैं जिनमें शासन को त्वरित कार्यवाही की आवश्यकता है ताकि अनेक निर्दोष महिलाओं एवं बच्चों को अंध विश्वास की इस कुपरंपरा एवं प्रताडऩा से बचाया जा सके।    

सामाजिक बहिष्कार मानवाधिकार के खिलाफ — 


अंध श्रद्धा निर्मूलन समिति के अध्यक्ष डॉ. दिनेश मिश्र ने कहा कि सामाजिक रीति-रिवाजों की आड़ लेकर सामाजिक बहिष्कार के मनमाने फरमान जारी करने की प्रथा अब बड़ी सामाजिक कुरीति के रूप में सामने आ गई है। उन्होंने जनजागरण अभियान के दौरान विभिन्न स्थानों का दौरा करने के दौरान पाया कि पिछले सप्ताह ही सामाजिक बहिष्कार के ५० से अधिक मामले सामने आये हैं जिन्हें किसी न किसी कारणों से समाज से बहिष्कृत कर दिया गया है। पीडि़तजनों को विभिन्न कारणों से समाज से बहिष्कृत कर दिया गया है जिन्हें गाँव में दूध, राशन, मजदूर यहाँ तक कि बात करने तक पर जुर्माना करने की घोषणा कर दी गई है। ऐसे ही कुछ मामले प्रकाश में आये हैं। बहिष्कृत व्यक्ति को शादी, मृत्यु, पर्व, त्यौहार, सामाजिक, सांस्कृतिक कार्यक्रमों, सार्वजनिक उपयोग के स्थल जैसे बाजार, तालाब, नदी के उपयोग से वंचित कर दिया जाता है। समिति सामाजिक बहिष्कार की सजाओं के विरोध में तथा उन्हें न्याय दिलाने एवं कानून बनाने के लिए अभियान चला रही है। 
राजनांदगांव जिले के डोंगरगढ़ ब्लॉक के ग्राम पेंड्री में 50 सिन्हा परिवारों का सामाजिक बहिष्कार कर दिया गया है। उनके परिवार के बेटियों के रिश्ते व सगाईयाँ भी टूट चुकी हैं तथा उनका समाज में हुक्का-पानी बंद किया जा चुका है। उसी प्रकार कसडोल में देवाँगन परिवार के श्री फिरत राम देवाँगन का सामाजिक बहिष्कार होने से उक्त परिवार संकट में आ चुका है, उन्हें सामाजिक कार्यक्रमों मेंं आमंत्रित नहीं किया जाता है तथा इस संबंध में आयोजित बैठक के पश्चात् घर लौटते समय ही इसी सदमें में उसकी पत्नी की मृत्यु हो चुकी है तथा उस परिवार के सामने गंभीर स्थिति उत्पन्न हो गई है।
डॉ. दिनेश मिश्र ने कहा कि सामाजिक बहिष्कार के फरमान से बहिष्कृत व्यक्ति का जीवन कठिन हो जाता है। वह व्यक्ति व उसके परिवार का हुक्का पानी बंद कर दिया जाता है तथा किसी का समाज से बहिष्कार करने की सजा मृत्यु दण्ड से भी कठोर सजा है क्योंकि मृत्यु दण्ड में वह व्यक्ति एक बार में अपने जीवन से मुक्त हो जाता है परंतु समाज से बाहर निकाले व्यक्ति व उसके परिवार को घुट-घुट कर जीवन बिताना पड़ता है तथा यही नहीं उसके परिवार व बच्चों को भी प्रतिदिन सामाजिक उपेक्षा का सामना करना पड़ता है।
डॉ. मिश्र ने कहा कि उन्हें जानकारी मिली है कि कुछ समाजों में उनके तथाकथित ठेकेदारों ने सामाजिक बहिष्कार को खत्म करने के लिए बकायदा रेट लिस्ट तक तय कर दी है जिसमें यदि वह व्यक्ति किसी कार्यक्रम में शामिल होता है रू 15000/- जुर्माना, यदि बीपीएल कार्डधारी है तो 35000/- जुर्माना, यदि उसका परिवार साथ देता है 50000/- जुर्माना, यदि मध्यम परिवार का व्यक्ति है उसे पचास हजार से पचहत्तर हजार रूपये जुर्माना, यदि उच्च परिवार से व्यक्ति है तो उसे एक लाख से डेढ़ लाख रूपये तक जुर्माने का प्रावधान रखा गया है। डॉ. मिश्र ने कहा उनके पास कुछ लोगों की रसीदें हैं जिनसे लाख रूपये तक जुर्माना वसूला गया है। उनके पास कुछ ऐसे भी मामले आये हैं जिनमें किसी सदस्य की मृत्यु होने पर दाह संस्कार में समाज के लोगों को शामिल करने के लिए दस हजार रूपये तक जुर्माना लिया गया है।
डॉ. मिश्र कहा कि यदि इस संबंध में सक्षम कानून बनाया जाता है तो हजारों निर्दोष व्यक्तियों को बहिष्कार की प्रताडऩा से बचाया जाना संभव होगा। राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, उच्च न्यायाधीश सहित देश के सभी जनप्रतिनिधियों, विधायकों, सांसदों को पत्र लिखकर इस संबंध में कानून बनाने की मांग की गई है। पर अब तक कोई ठोस परिणाम नही निकला है ,समिति इस सम्बंध में सभी जिलों में पीडि़तों से सम्पर्क कर रही है,तथा उन्हें पीडि़तों के आवेदन प्राप्त हो रहे हैं तथा उनकी समस्याओं के निराकरण का प्रयास कर रही है।

Wednesday, January 31, 2018

चंद्रग्रहण खगोलीय घटना : अंधविश्वास में न पड़ें—डॉ. दिनेश मिश्र
दुर्लभ खगोलीय घटना के साक्षी बनें
अंधश्रद्धा निर्मूलन समिति के अध्यक्ष डॉ. दिनेश मिश्र ने कहा चंद्रग्रहण एक खगोलीय घटना है। डॉ. दिनेश मिश्र ने कहा प्रारंभ में यह माना जा रहा था कि चंद्रग्रहण राहू-केतू के चंद्रमा को निगलने से होता है, जिससे धीरे-धीरे विभिन्न अंधविश्वास व मान्यताएँ जुड़ती चली गईं, लेकिन बाद में विज्ञान ने यह सिद्ध किया कि चंद्रग्रहण पृथ्वी की छाया के कारण होता है। जब चंद्रमा पृथ्वी की छाया में प्रवेश करता है तब उसका एक किनारा जिस पर छाया पडऩे लगती है काला होना शुरू हो जाता है जिसे स्पर्श कहते हैं। जब पूरा चंद्रमा छाया में आ जाता है तब पूर्णग्रहण हो जाता है। जब चंद्रमा का पहला किनारा दूसरी ओर छाया से बाहर निकलना शुरू होता है तो ग्रहण छूटना शुरू हो जाता है। जब पूरा चंद्रमा पृथ्वी की छाया से बाहर आ जाता है तो ग्रहण समाप्त हो जाता है जिसे ग्रहण का मोक्ष कहते हैं। चंद्रग्रहण का कहीं कोई दुष्प्रभाव नहीं है, इसे लेकर तरह-तरह के भ्रम व अंधविश्वास हैं। लेकिन लोगों को इन अंधविश्वासों में नहीं पडऩा चाहिए तथा ग्रहण को सुरक्षित ढंग से देखा जा सकता है तथा वैज्ञानिक इसका अध्ययन भी करते हैं।
भारत के महान खगोलविद् आर्यभट्ट ने आज से करीब 1500 वर्ष पहले 499 ईस्वी में यह सिद्ध कर दिया था कि चन्द्रग्रहण सिर्फ एक खगोलीय घटना है जो कि चन्द्रमा पर पृथ्वी की छाया पडऩे से होती है। उन्होंने अपने ग्रंथ आर्यभट्टीय के गोलाध्याय में इस बात का वर्णन किया है। इसके बाद भी चन्द्रग्रहण की प्रक्रिया को लेकर विभिन्न भ्रम एवं अंधविश्वास कायम है।
डॉ. मिश्र ने कहा 31 जनवरी को इस वर्ष का प्रथम चंद्रग्रहण होने वाला है।  31 जनवरी को चंद्रग्रहण के समय हम ऐसी दुर्लभ खगोलीय घटना के साक्षी बनने वाले हैं जो आज से करीब 150 वर्ष पूर्व 1866 में घटित हुई थी। इस चंद्रग्रहण में चंद्रमा की 3 विशेष अवस्थाएँ दर्शनीय रहेंगी— 1. सुपर मून या वृहद चंद्रमा अर्थात् चंद्रमा पृथ्वी के सबसे नजदीक होने से सामान्य से 14 प्रतिशत बड़ा और 30 प्रतिशत अधिक चमकीला दिखाई देगा, 2. ब्लू मून, जब माह में दो बार पूर्ण चंद्रमा दिखाई देता है तो उसे ब्लू मून कहा जाता है तथा 3. ब्लड मून या कॉपर मून, जब पूर्ण चंद्रग्रहण होता है तो पृथ्वी पूरी तरह से सूर्य और चंद्रमा के बीच में आ जायेगी तब पूर्ण चंद्रग्रहण होगा। इसमें ब्लू अथवा नीला प्रकाश पूरी तरह से फिल्टर हो जाता है तथा आरेंज या रेड लाईट बच जाती है जिसके कारण यह ब्लड अथवा कॉपर मून कहलाता है। चंद्रग्रहण 3 घंटे 52 मिनट का होगा जो शाम को 5:46 से शुरू होने वाला ग्रहण 9:38 तक रहेगा। यह एक अनोखी खगोलीय घटना है। सभी नागरिकों को इसे बिना किसी डर या संशय के देखना चाहिए। चंद्रग्रहण देखना पूर्णत: सुरक्षित है।
डॉ. मिश्र ने कहा जब चंद्रग्रहण होने वाला होता है तब विभिन्न भविष्यवाणियाँ सामने आने लगती हैं जिससे आम लोग संशय में पड़ जाते हैं जबकि चंद्रग्रहण में खाने-पीने, बाहर निकलने की बंदिशों का कोई वैज्ञानिक आधार नहीं है। ग्रहण से खाद्य वस्तुएँ अशुद्ध नहीं होती तथा उनका सेवन करना उतना ही सुरक्षित है जितना किसी सामान्य दिन या रात में भोजन करना। इस धारणा का भी कोई वैज्ञानिक आधार नहीं है कि गर्भवती महिला के गर्भ में पल रहे शिशु के लिए चंद्रग्रहण हानिकारक होता है तथा ग्रहण की वजह से स्नान करना कोई जरूरी नहीं है अर्थात् इस प्रकार की आवश्यकता का कोई वैज्ञानिक आधार नहीं है तथा ग्रहण का अलग-अलग व्यक्तियों पर भिन्न प्रभाव पडऩे की मान्यता भी काल्पनिक है। यह सब बातें केन्द्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय द्वारा जारी पुस्तिका में भी दर्शायी गयी है।
डॉ. दिनेश मिश्र
नेत्र विशेषज्ञ
अध्यक्ष, अंधश्रद्धा निर्मूलन समिति
नयापारा, फूल चौक, रायपुर (छत्तीसगढ़)

Sunday, November 12, 2017

बेल्जियम स्थित भारतीय दूतावास में भारत के काउंसलर से  भेंट,अंधविश्वास विरोधी अभियान पर चर्चा ।  अंध श्रद्धा निर्मूलन समितिके अध्यक्ष डॉ दिनेश मिश्र ने बेल्जियम के ब्रुसेल्स स्थित भारतीय राजदूतावास के आमंत्रण पर  भारत के काउंसलरश्री  राकेश मेहरा से सौजन्य भेंट की ,तथा उन्हेंअपने
अभियान की जानकारी दी ।  डॉ दिनेश मिश्र ने  पिछले दिनों अंधविश्वास एवं सामाजिक कुरीतियों के ख़िलाफ़ चलाये जा रहे अभियान के अंतर्गत  यूनाइटेड नेशन्स द्वारा जिनेवा में आयोजित कार्यशाला में भारत का प्रतिनिधित्व किया था तथा डायन प्रताड़ना और मानवाधिकार के मुद्दे पर एशिया पैसिफिक देशों में व्याप्त  कुरीतियों पर शोध पत्र पढ़ा था ।तदुपरांत बेल्जियम के भारतीय राजदूतावास के आमंत्रण पर ब्रुसेल्स स्थित दूतावास गए और दूतावासके उच्चाधिकारी और काउंसलरश्री राकेश मेहरा से सौजन्य भेंट की,तथा उन्हें अंधविश्वास और सामाजिक कुरीतियों के सम्बन्ध में विस्तृत चर्चा करते हुए इन कुरीतियों के कारण होने वाले मानव अधिकारों के हनन के संबंध में जानकारी दी । एशिया के अनेक देशों जैसे नेपाल ,पाकिस्तान,बांग्लादेश,सहित अनेक देशों से ऐसी घटनाओं के समाचार मिलते है जिनका निर्मूलन सामाजिक जागरूकता  से संभव है ।यूनाइटेड नेशंस इस संबंध में एक कार्ययोजना तैयार कर रहा है।


अंधविश्वास के कारण भी  प्रताड़ना और  मानवाधिकार हनन                          **जिनेवा मे व्याख्यान* *                @प्रदेश के वरिष्ठ नेत्र विशेषज्ञ एवं अंधश्रद्धा निर्मूलन समिति के अध्यक्ष डॉ .दिनेश मिश्र ने  यूनाइटेड नेशंस द्वारा जिनेवा में आयोजित  अंतरराष्ट्रीय कार्यशाला मे कहा कि संसार के अनेक देशों से अंधविश्वास के कारण महिलाओ के साथ प्रताड़ना की घटनाएं घटती है और उनके मानवाधिकार हनन के मामले सामने आते है ,जो चिंतनीय  है ।अविकसित और विकासशील  देशों से ऐसी घटनाओ की खबरें अधिक हैं   डॉ दिनेश मिश्र ने डायन प्रताड़नाऔरमानवाधिकार(witchcraft and human right)  विषय पर व्याख्यान देते हुए कहा महिला प्रताड़ना और उनके मानवाधिकार हनन के कारणों में एक प्रमुख कारण अंधविश्वास और डायन के संदेह में प्रताड़ना भी है जो एशिया के देशों ,नेपाल ,पाकिस्तान, बंग्लादेश,श्रीलंका , अफ्रीका के  अनेक देशों में जारी है।उनके पास एशिया सहित दक्षिण अफ्रीका ,तंजानिया ,यूगांडा अनेक देशों में घटित घटनाओं  के आंकड़े हैऔर मामलों की जानकारी है जो महिलाओं के अधिकारों को लेकर किये जाने वाले दावों और वास्तविकता स्थिति  के संबंध भिन्नता बताती है ।महिला प्रताड़ना के मामलों में तो उन्हें मानव या इंसान ही नही समझा जाता तो उन्हें मानव अधिकार देने के दावे झूठे साबित हो जाते है । अशिक्षा, स्वास्थ्य सुविधाओं  और ,वैज्ञानिक जागरूकता की कमी ,गैर जरूरी,परंपराओं    को  आंख मूंद कर पालन करने की आदत से न ही अंधविश्वास खत्म हो पाते हैं  और न ही पीड़ितों को राहत मिल पाती है । अफ्रीका में  काला जादू  मुस्लिम देशों में जिन्न,प्रेत,एशिया केबहुत से देशों  डायन ,चुड़ैल ,जैसे अंधविश्वास आज भी व्याप्त है जिनके कारण महिलाओ और बच्चों को शारीरिक मानसिक प्रताड़ना का शिकार होना पड़ता है अनेक मामलों में प्रताड़ना के चलते पीड़ितों की हत्या भो कर दी जाती है और उन्हें मारपीट अंगभंग ,सार्वजनिक अपमान ,सामाजिक बहिष्कार जैसी परिस्थिति का शिकार होना पड़ता है ।।  डॉ मिश्र ने कहा  विभिन्न अंधविश्वासों के कारण होने वाले मानवाधिकार हनन के मामलों  और डायन के संदेह में प्रताड़ना के निर्मूलन के लिए सामाजिक  जागरूकता अभियान,स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने व सक्षम कानून   बना महिलाओऔर सभी प्रताडितों  के अधिकारों की रक्षा की जासकती है ।दक्षिण अफ्रीका के बहुत से देशों में तो एल्बिनो को लेकर काफी अंधविश्वास है औरबड़ों के साथ बच्चोँ  का भी न केवल अंग भंग कर दिया जाता है ,बल्कि उनका अपहरण व क्रूरता पूर्वक हत्या तक हो जाती है ।यूनाइटेड नेशन्स को  डायन के संदेह में प्रताड़ित  महिलाओ के अधिकारों और उनके जीवन की रक्षा के लिए ठोस पहल करने की आवश्यकता है ताकि  प्रताडितों को राहत और न्याय मिल सके ।                यूनाइटेड नेशन्स के जिनेवा स्थित मुख्यालय में 21 व 22 सितंबर को आयोजित इस कार्यशालामें यूरोप ,अफ्रीका ,आस्ट्रेलिया, ब्रिटेन,कनाडा  ,के मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष, विश्विद्यालयों के प्रतिनिधि, सामाजिक कार्यकर्ता सहित यूनाइटेड नेशंस के मानवाधिकार परिषद केचेयरमेन काते गिलमोर,और यूनाइटेड नेशंस की प्रतिनिधि इरो इकपोनवोसा,विचक्राफ्ट एंड ह्यूमन राइट नेटवर्क के चेयरमेन गैरी फ़ॉक्सफ़ोर्ट सहित पदाधिकारियों ने भाग लिया                            













Sunday, August 27, 2017

टोनही के संदेह में प्रताडि़त महिलाओं ने डॉ. दिनेश मिश्र को  राखी बाँधी
अंधश्रद्धा निर्मूलन समिति का ग्राम लचकेरा में अभियान

अंधश्रद्धा निर्मूलन समिति ने रक्षाबंधन का त्यौहार गरियाबंद जिले के ग्राम लचकेरा में मनाया जहां कुछ वर्षों पूर्व तीन महिलाओं को टोनही के आरोप में क्रूरतम शारीरिक एवम मानसिक प्रताडऩा दी गई थी समिति ने अंधविश्वास के कारण समाज से प्रताडि़त एवं बहिष्कृत महिलाओं को जोडऩे की इस मुहिम के अंतर्गत यह पहल की। 
इस क्रम में आज समिति के अध्यक्ष डॉक्टर दिनेश मिश्र ने अपने साथियों सहित ग्राम लचकेरा का दौरा किया ग्राम में जाकर प्रताडि़त महिलाओं तीरिथ बाई और बिसाहिन बाई से मिले, महिलाओं ने उन्हें राखी बांधी। ग्राम लचकेरा की उन प्रताडि़त महिलाओं ने बताया की 1६ वर्षों बाद भी नही उन्हें न्याय मिला है ना ही उन्हें मुआवजा प्राप्त हुआ है और तो और जो दोषी ग्रामीण हैं उन्हें सजा भी नहीं मिली है। समिति की ओर से डॉक्टर दिनेश मिश्र ने उन्हें हर संभव मदद एवं मार्गदर्शन का भरोसा दिलाया। इसके बाद समिति के सदस्यों ने लचकेरा ग्राम की उप सरपंच श्रीमती बाई निषाद से मुलाकात की और उन्हें टोनही प्रताडऩा से संबंधित पोस्टर पॉम्पलेट एवं किताबें भेंट की जिन्हें लचकेरा के ग्राम पंचायत भवन में लगाया जाएगा। 
समिति के सदस्यों ने ग्राम का दौरा किया। ग्रामीणों से मिले तथा उन्हें किसी भी अंधविश्वास में ना पडऩे की समझाइश देते हुए डॉ. दिनेश मिश्र ने कहा जादू - टोने का कोई अस्तित्व नहीं है तथा कोई महिला टोनही नहीं होती। पहले जब बीमारियों व प्राकृतिक आपदाओं के संबंध में जानकारी नहीं थी तब यह विश्वास किया जाता था कि मानव व पश्ुा को होने वाली बीमारियां जादू-टोने से होती है तथा ऐसे में कई बार विशेष महिलाओं पर जादू-टोना करने का आरोप लग जाता है।  गंदगी, प्रदूषित पीने के पानी, भोज्य पदार्थ के दूषित होने, मक्खियां, मच्छरो के बढने से बीमारियां एकदम से बढ़ जाती है तथा पूरी बस्ती ही मौसमी संक्रामक रोगों की शिकार हो जाती है। वहीं हाल फसलों व पशुओं का भी होता है, इन मौसमी बीमारियों से बचाव के लिए पीने का पानी साफ हो, भोज्य पदार्थ दूषित न हो, गंदगी न हो, मक्खिंया, मच्छर न बढ़े,जैसी बुनियादी बातों पर ध्यान देने की आवश्यकता है।